Super El Nino: देश के ज्यादातर हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी का कहर देखने को मिल रहा है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। लगातार चल रही लू ने लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर में बन रहा संभावित “सुपर एल-नीनो” इस बार दुनिया भर के मौसम को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इसका असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
कई शहरों में पारा पहुंचा खतरनाक स्तर पर
दिल्ली-एनसीआर में बुधवार को तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया। वहीं उत्तर प्रदेश के बांदा में लगातार दूसरे दिन तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। अहमदाबाद, नागपुर और विदर्भ क्षेत्र में भी तेज गर्मी और लू का असर दिखाई दिया।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी India Meteorological Department ने कई राज्यों में भीषण लू का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक हालात और गंभीर हो सकते हैं।
क्या है एल-नीनो?
एल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो तब बनती है जब पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है। समुद्र का यह बढ़ा हुआ तापमान वैश्विक हवाओं और मौसम प्रणालियों को प्रभावित करता है।
भारत में एल-नीनो का सीधा असर मानसून पर पड़ता है। इसकी वजह से बारिश कम हो सकती है और सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। साथ ही तापमान सामान्य से अधिक बढ़ने लगता है।
क्यों खतरनाक माना जा रहा है ‘सुपर एल-नीनो’?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जब समुद्र की सतह का तापमान लंबे समय तक सामान्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तब उसे “सुपर एल-नीनो” कहा जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार समुद्र के तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है, जो 1877 के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है। 1877 का एल-नीनो इतिहास की सबसे विनाशकारी जलवायु घटनाओं में गिना जाता है।
गर्मी बढ़ने के पीछे स्थानीय कारण भी जिम्मेदार
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ एल-नीनो ही नहीं, बल्कि कई स्थानीय कारण भी गर्मी को बढ़ा रहे हैं।
1. बादलों की कमी और सूखा मौसम
लंबे समय से बारिश न होने और आसमान साफ रहने के कारण सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ रही हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ रहा है।
2. शहर बन रहे ‘हीट आइलैंड’
कंक्रीट की इमारतें, वाहनों का धुआं, एयर कंडीशनर से निकलने वाली गर्म हवा और औद्योगिक प्रदूषण शहरों को “हीट आइलैंड” में बदल रहे हैं। यही वजह है कि शहरों में तापमान ग्रामीण इलाकों से ज्यादा रिकॉर्ड हो रहा है।
मानसून और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के मुताबिक सुपर एल-नीनो का असर सिर्फ गर्मी तक सीमित नहीं रहेगा। इससे मानसून कमजोर हो सकता है, जिससे खेती और जल संकट पर असर पड़ेगा।
इतिहास में भी एल-नीनो की वजह से भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। 1997-98 के एल-नीनो को “सदी का एल-नीनो” कहा गया था, जिससे वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर का नुकसान हुआ था।

