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शुक्रवार, अगस्त 14, 2026
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Supreme Court: दो से ज्यादा बच्चों पर चुनाव लड़ने की रोक पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल, जाने किस राज्य में जारी हुई निति

Supreme Court ने महाराष्ट्र में दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को पंचायत और अन्य स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से रोकने वाली नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत जैसे देश में, जहां प्रजनन दर लगातार घट रही है, ऐसे कानून की संवैधानिक वैधता और औचित्य पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है।

2003 के फैसले पर भी हो सकता है पुनर्विचार

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 की धारा 14(1)(j-1) से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने संकेत दिया कि वर्ष 2003 में जावेद बनाम हरियाणा राज्य मामले में दिए गए फैसले, जिसमें हरियाणा की समान नीति को वैध ठहराया गया था, उस पर भी पुनर्विचार किया जा सकता है।

सरपंच की अयोग्यता से जुड़ा मामला

यह मामला काकोडा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव से जुड़ा है, जिन्हें तीसरे बच्चे के जन्म के बाद महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम के तहत अयोग्य घोषित किया गया था। अतिरिक्त कलेक्टर, अतिरिक्त आयुक्त और बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी उनकी अयोग्यता को बरकरार रखा था।

सात राज्यों के कानूनों का होगा अध्ययन

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को व्यापक संवैधानिक महत्व का मानते हुए महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता रुक्मिणी बोबडे को न्यायालय मित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किया है। अदालत ने उन्हें उन सात राज्यों के कानूनों का अध्ययन करने का निर्देश दिया है, जहां दो-बच्चों की शर्त लागू है। साथ ही भारत की घटती प्रजनन दर से जुड़े उपलब्ध अध्ययनों और रिपोर्टों का भी परीक्षण करने को कहा गया है।

अंतरिम रोक पहले ही लग चुकी है

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अगस्त 2025 में याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में उस आदेश के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अब शीर्ष अदालत इस नीति की संवैधानिक वैधता और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में विस्तृत सुनवाई करेगी।

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