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रविवार, अगस्त 30, 2026
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मोबाइल नेटवर्क को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, अब एक टावर देगा ज्यादा एरिया में 5G कवरेज

Tech News: अगर आपके घर में 5G सिग्नल कमजोर रहता है या बेसमेंट, पार्किंग और ऊंची इमारतों में जाते ही नेटवर्क गायब हो जाता है, तो आपके लिए अच्छी खबर है। सरकार ने मोबाइल नेटवर्क की कवरेज और क्षमता बेहतर करने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) रेडिएशन लिमिट्स में बदलाव को मंजूरी दी है। इसका मकसद बढ़ते 5G ट्रैफिक के बीच नेटवर्क क्वालिटी को बेहतर बनाना है।

सरकार ने क्यों बदले मोबाइल नेटवर्क के नियम?

भारत में 5G यूजर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कई जगहों पर नेटवर्क पर दबाव बढ़ने लगा है। इसका असर कॉल ड्रॉप, धीमी इंटरनेट स्पीड और कमजोर इनडोर कवरेज के रूप में देखने को मिलता है।

नई व्यवस्था के तहत EMF लिमिट्स को ग्लोबल स्टैंडर्ड के बराबर करने की मंजूरी दी गई है। इससे टेलीकॉम कंपनियां मौजूदा मोबाइल टावरों से ज्यादा प्रभावी तरीके से नेटवर्क कवरेज दे सकेंगी।

एक टावर से मिलेगा ज्यादा कवरेज

इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि एक मोबाइल टावर पहले की तुलना में बड़े क्षेत्र को कवर कर पाएगा। यानी हर छोटी जगह पर नया टावर लगाने की जरूरत कम हो सकती है।

खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में इसका फायदा देखने को मिल सकता है। जहां टावर लगाने के लिए जगह की समस्या होती है, वहां मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

घर और बेसमेंट में भी बेहतर हो सकता है 5G

अगर आपको घर के अंदर मोबाइल सिग्नल कमजोर मिलने की शिकायत रहती है, तो आने वाले समय में इसमें सुधार देखने को मिल सकता है। पार्किंग, बेसमेंट और ऊंची इमारतों जैसे स्थानों पर भी बेहतर नेटवर्क कवरेज मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, किसी खास इलाके में नेटवर्क कितना बेहतर होगा, यह टावर की स्थिति, बिल्डिंग की बनावट और टेलीकॉम कंपनी के नेटवर्क पर भी निर्भर करेगा।

कॉल ड्रॉप और बफरिंग से मिलेगी राहत?

5G पर बढ़ते ट्रैफिक के कारण पीक टाइम में नेटवर्क पर लोड बढ़ जाता है। बेहतर कवरेज और क्षमता से कॉल ड्रॉप तथा इंटरनेट बफरिंग जैसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है। यूजर्स को खासकर व्यस्त समय में ज्यादा स्थिर कनेक्टिविटी मिल सकती है।

रेडिएशन को लेकर क्या है चिंता?

EMF लिमिट्स बढ़ाए जाने के बाद रेडिएशन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। रिपोर्ट के मुताबिक नई सीमा को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया गया है। हालांकि, मोबाइल रेडिएशन से जुड़े स्वास्थ्य दावों को समझने के लिए निर्धारित सुरक्षा सीमाओं और वैज्ञानिक प्रमाणों को ध्यान में रखना जरूरी है।

कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम भारत में बढ़ते 5G इस्तेमाल के बीच नेटवर्क कवरेज और कनेक्टिविटी सुधारने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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