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शनिवार, अगस्त 1, 2026
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स्वामी कैलाशानन्द गिरि का बड़ा संदेश, बोले- लोकतंत्र में विरोध करें लेकिन भाषा की मर्यादा न भूलें

Swami Kailashanand Giri Message: पूज्य आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज ने देश के युवाओं और नागरिकों के नाम एक महत्वपूर्ण संदेश जारी करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों, शालीनता और भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। यह अधिकार भारतीय संविधान द्वारा सभी नागरिकों को समान रूप से प्रदान किया गया है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री के संदेश का किया समर्थन

स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी ने कहा कि देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं के लिए दिया गया संदेश लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने वाला है। इस संदेश में संवाद, संविधान के सम्मान और शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति की भावना को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान यही है कि लोग अपने विचार स्वतंत्र रूप से रखें, लेकिन सामाजिक मर्यादाओं का भी पालन करें।

विरोध का अधिकार है, लेकिन भाषा भी हो मर्यादित

उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी विषय पर मतभेद होना लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है। हालांकि, किसी भी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति, विशेष रूप से देश के प्रधानमंत्री या उनके परिवार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अभद्र, अपमानजनक या अशोभनीय भाषा का प्रयोग भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

स्वामी जी के अनुसार विचारों का विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी या अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल समाज में गलत संदेश देता है और लोकतांत्रिक गरिमा को भी प्रभावित करता है।

युवाओं से की संयम और राष्ट्रहित की अपील

अपने संदेश में उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग पूरी जिम्मेदारी, संयम और शालीनता के साथ करें। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथ में है और उनके विचार, व्यवहार तथा भाषा ही समाज की दिशा तय करते हैं।

स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी ने अंत में सभी नागरिकों से लोकतांत्रिक परंपराओं, संविधान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन परस्पर सम्मान, सभ्यता और राष्ट्रहित की भावना हमेशा सर्वोपरि रहनी चाहिए। यही स्वस्थ लोकतंत्र और मजबूत समाज की पहचान है।

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