UP news:उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस अपने पुराने नेताओं और अलग-अलग सामाजिक समीकरणों को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इसी बीच बीजेपी से जुड़े दो चर्चित चेहरों—रायबरेली की विधायक अदिति सिंह और पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी—की कांग्रेस में संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि, अभी दोनों नेताओं की कांग्रेस में वापसी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इसे फिलहाल राजनीतिक संभावनाओं और चर्चाओं के तौर पर ही देखा जा रहा है।
अदिति सिंह की ‘घर वापसी’ से क्या बदलेगा?
अदिति सिंह का राजनीतिक आधार रायबरेली से जुड़ा रहा है। उनके पिता अखिलेश सिंह रायबरेली सदर सीट से पांच बार विधायक रहे थे। साल 2017 में अदिति ने कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने कांग्रेस से दूरी बनाई और बीजेपी में शामिल हो गईं।
2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर रायबरेली सदर सीट से दोबारा जीत हासिल की। हालांकि उनकी जीत का अंतर बहुत बड़ा नहीं था। ऐसे में अगर वह कांग्रेस में लौटती हैं तो सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि उनका व्यक्तिगत प्रभाव कितना वोट कांग्रेस के खाते में ला पाएगा।
कांग्रेस के लिए अदिति की वापसी सिर्फ एक पुराने चेहरे को जोड़ने तक सीमित नहीं होगी। पार्टी उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर महिला और युवा नेतृत्व के तौर पर भी आगे बढ़ा सकती है।
राहुल गांधी के रायबरेली कनेक्शन का असर
2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने रायबरेली से जीत दर्ज की थी। इसके बाद कांग्रेस को इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत होने की उम्मीद है। ऐसे में अगर अदिति सिंह भी कांग्रेस के साथ आती हैं तो रायबरेली में सांसद और स्थानीय संगठन के बीच बेहतर तालमेल का राजनीतिक संदेश दिया जा सकता है।
हालांकि, यह भी देखना होगा कि बीजेपी के संगठन और वोट ट्रांसफर की भूमिका को अलग करके अदिति का अपना राजनीतिक जनाधार कितना मजबूत है।
रीता बहुगुणा जोशी की वापसी क्यों अहम?
रीता बहुगुणा जोशी का कांग्रेस से पुराना और मजबूत रिश्ता रहा है। वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं और लंबे समय तक पार्टी की राजनीति में सक्रिय रही हैं। उनके पिता हेमवती नंदन बहुगुणा भी उत्तर प्रदेश की राजनीति के बड़े नाम रहे हैं।
2016 में रीता बहुगुणा जोशी बीजेपी में शामिल हुई थीं। इसके बाद उन्होंने लखनऊ कैंट से विधानसभा चुनाव जीता और 2019 में प्रयागराज से लोकसभा चुनाव भी जीतकर संसद पहुंचीं। 2024 में बीजेपी ने उन्हें लोकसभा टिकट नहीं दिया।
ऐसे में 2027 से पहले उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं होना स्वाभाविक है। अगर वह कांग्रेस में लौटती हैं तो पार्टी को अनुभवी नेता के साथ-साथ एक ऐसा चेहरा मिल सकता है, जिसका यूपी की राजनीति और कांग्रेस संगठन से पुराना जुड़ाव रहा है।
बेटे मयंक जोशी का फैक्टर
रीता बहुगुणा जोशी के राजनीतिक समीकरणों में उनके बेटे मयंक जोशी का नाम भी महत्वपूर्ण माना जाता है। 2022 में बीजेपी से टिकट की चर्चा के बीच उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात की तस्वीर सामने आई थी, जिसके बाद उनके सपा में जाने की अटकलें लगी थीं। हालांकि उन्होंने सपा की सदस्यता नहीं ली।
2027 के चुनाव से पहले अगर रीता बहुगुणा जोशी की कांग्रेस में वापसी होती है तो उनके साथ उनके परिवार की राजनीतिक भूमिका भी चर्चा का विषय बन सकती है।

