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शनिवार, जुलाई 18, 2026
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Bollywood News: अधूरी मोहब्बत का दर्द लेकर जीते रहे ओम प्रकाश, फिर इंसानियत के लिए लिया सबसे बड़ा फैसला

Bollywood News: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और शानदार कॉमेडियन ओम प्रकाश ने अपनी दमदार अदाकारी से लाखों दिलों में जगह बनाई। फिल्मों में वह अक्सर लोगों को हंसाते नजर आए, लेकिन उनकी निजी जिंदगी एक ऐसे दर्द से भरी थी जिसे उन्होंने कभी खुलकर जाहिर नहीं किया। उनकी अधूरी प्रेम कहानी और इंसानियत के लिए लिया गया फैसला आज भी लोगों को भावुक कर देता है।

बचपन से था अभिनय और संगीत का शौक

19 दिसंबर 1919 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में जन्मे ओम प्रकाश छिब्बर को बचपन से ही अभिनय और संगीत में खास दिलचस्पी थी। महज 17-18 साल की उम्र में उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में 25 रुपये मासिक वेतन पर नौकरी शुरू की। रेडियो पर निभाया गया उनका लोकप्रिय किरदार लोगों के बीच काफी चर्चित हुआ और यहीं से उनके अभिनय का सफर आगे बढ़ा।

एक दोस्त की शादी में उनकी प्रस्तुति देखकर प्रसिद्ध फिल्म निर्माता दलसुख पंचौली प्रभावित हुए और उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका दिया।

फिल्मों में बनाई अलग पहचान

साल 1944 में फिल्म ‘दासी’ से ओम प्रकाश ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद देश के बंटवारे ने उनकी जिंदगी बदल दी और उन्हें मुंबई आना पड़ा। यहां उन्होंने संघर्ष के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई।

करीब 300 से ज्यादा फिल्मों में काम करते हुए उन्होंने ‘जंजीर’, ‘शराबी’, ‘नमक हलाल’, ‘गोलमाल’ जैसी कई यादगार फिल्मों में ऐसे किरदार निभाए जिन्हें आज भी दर्शक याद करते हैं।

लाहौर में मिला पहला प्यार, लेकिन पूरी नहीं हो सकी कहानी

युवावस्था के दिनों में लाहौर में ओम प्रकाश को एक सिख युवती से गहरा प्रेम हो गया था। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन उस दौर में धर्म और सामाजिक बंदिशें उनके रिश्ते के बीच आ गईं। परिवारों की असहमति के कारण दोनों अलग हो गए।

बताया जाता है कि इस बिछड़ने के बाद ओम प्रकाश अंदर से टूट गए थे और उन्होंने जीवनभर किसी और को दिल में जगह न देने का फैसला कर लिया था।

इंसानियत के लिए बदला अपना फैसला

समय बीतने के साथ वह फिल्मों में व्यस्त हो गए, लेकिन किस्मत ने उनके सामने एक नई जिम्मेदारी रख दी। एक बीमार विधवा महिला अपनी बेटी प्रभा के साथ उनके पास पहुंची। महिला को अपनी मौत का डर था और वह चाहती थी कि उसकी बेटी सुरक्षित हाथों में रहे।

उस मां की मजबूरी देखकर ओम प्रकाश का दिल पसीज गया। उन्होंने अपने पुराने वादे को पीछे छोड़ते हुए इंसानियत और जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी और प्रभा से विवाह कर लिया। शादी के बाद उन्होंने पूरे सम्मान और समर्पण के साथ अपने रिश्ते को निभाया।

आज भी याद किए जाते हैं ओम प्रकाश

21 फरवरी 1998 को 78 वर्ष की आयु में ओम प्रकाश का निधन हो गया। उनकी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग, शानदार अभिनय और संवेदनशील व्यक्तित्व उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल करता है। उनकी जिंदगी यह सिखाती है कि सच्ची महानता सिर्फ पर्दे पर नहीं, बल्कि इंसानियत और रिश्तों को निभाने में भी होती है।

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