Bollywood News: बॉलीवुड में कई ऐसी फिल्में बनी हैं जो समय के साथ पुरानी नहीं होतीं। सूरज बड़जात्या की फिल्मों का नाम भी इसी सूची में शामिल है। उनकी फिल्मों में प्यार, परिवार, रिश्ते और संस्कार हमेशा सबसे अहम रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनकी तीन सबसे चर्चित फिल्मों के पीछे उनके पिता की सलाह का बड़ा योगदान रहा।
‘हम साथ-साथ हैं’ की शुरुआत कैसे हुई?
‘हम आपके हैं कौन’ की जबरदस्त सफलता के बाद सूरज बड़जात्या एक नई कहानी पर काम कर रहे थे। तभी उनके पिता ने सुझाव दिया कि एक बार फिर परिवार को कहानी का केंद्र बनाया जाए। इसी सलाह से ‘हम साथ-साथ हैं’ का जन्म हुआ।
फिल्म में सलमान खान, सैफ अली खान, मोहनीश बहल, तब्बू, करिश्मा कपूर और सोनाली बेंद्रे जैसे बड़े सितारे थे। लेकिन इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी भावनात्मक कहानी रही। भाई-बहन का प्यार, माता-पिता का सम्मान और परिवार की एकजुटता ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
एक अखबार की खबर से बनी ‘विवाह’
इसके बाद जब ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’ उम्मीद के मुताबिक सफलता हासिल नहीं कर सकी तो सूरज बड़जात्या थोड़े निराश थे। ऐसे समय में उनके पिता ने उन्हें एक पुराने अखबार में छपी खबर दिखाई। उसी घटना से प्रेरित होकर ‘विवाह’ की कहानी तैयार हुई।
शाहिद कपूर और अमृता राव की सादगी भरी प्रेम कहानी लोगों को इतनी पसंद आई कि फिल्म लंबे समय तक सिनेमाघरों में चली। इसके गाने, संवाद और किरदार आज भी दर्शकों की यादों का हिस्सा हैं।
सादगी ही बनी सबसे बड़ी ताकत
इन तीनों फिल्मों में कोई बड़े एक्शन सीन या भारी-भरकम ट्विस्ट नहीं थे। फिर भी ये फिल्में लोगों के दिलों में जगह बना गईं। इसकी वजह थी परिवार, प्यार, विश्वास और रिश्तों को बेहद सरल और भावुक अंदाज में दिखाना।
सूरज बड़जात्या ने हमेशा ऐसी कहानियां चुनीं जिनसे हर उम्र का दर्शक खुद को जोड़ सके। यही कारण है कि आज भी लोग इन फिल्मों को परिवार के साथ बैठकर देखना पसंद करते हैं।
आज भी कायम है इन फिल्मों का जादू
समय बदल गया, फिल्मों का अंदाज भी बदल गया, लेकिन ‘हम आपके हैं कौन’, ‘हम साथ-साथ हैं’ और ‘विवाह’ जैसी फिल्मों की लोकप्रियता आज भी बरकरार है। नई पीढ़ी भी इन फिल्मों को उतने ही प्यार से देखती है, क्योंकि इनमें मनोरंजन के साथ रिश्तों की गर्माहट और परिवार की खूबसूरती देखने को मिलती है। यही सूरज बड़जात्या की फिल्मों की सबसे बड़ी पहचान है।

