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बुधवार, अगस्त 26, 2026
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Nepal Flood: नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मचा हाहाकार, 9 की मौत और 105 भारतीय लापता

Nepal Flood: नेपाल के उत्तरी रसुवा जिले में बुधवार सुबह तिब्बत सीमा के पास अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। तेज बहाव के कारण कई घर, वाहन, पुल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स बह गए। हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत और 105 भारतीयों के लापता होने की खबर सामने आई है। बाढ़ का पानी निचले इलाकों की ओर बढ़ रहा है, जिसके चलते भारत के बिहार में भी प्रशासन को अलर्ट किया गया है।

तिमुरे और स्याफ्रुबेसी में सबसे ज्यादा नुकसान

अधिकारियों के मुताबिक बुधवार सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की तरफ से भोटे कोशी नदी में अचानक तेज पानी आया। इसके बाद रसुवा जिले के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके में स्थिति बिगड़ गई।

तिब्बत के ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग के पास मडस्लाइड की भी जानकारी सामने आई है। अचानक आई बाढ़ की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के मुताबिक रसुवा में भारी बारिश को इसका मुख्य कारण मानने की संभावना कम है। सैटेलाइट तस्वीरों में तिब्बत की तरफ भारी बारिश दिखाई दी है।

बॉर्डर मार्केट और पुल भी बहे

बाढ़ के पानी ने तिब्बत सीमा के पास स्थित तिमुरे बाजार और कस्टम्स इलाके को भी भारी नुकसान पहुंचाया। कई वाहन और सामान पानी में बह गए। रसुवागढ़ी में बनाया गया फ्रेंडशिप ब्रिज भी बाढ़ की चपेट में आकर बह गया। यह पुल पिछले साल आई बाढ़ के बाद दोबारा बनाया गया था।

नेपाल पुलिस के मुताबिक तीन पुलिस केंद्रों को भी नुकसान पहुंचा है। तिमुरे में तैनात आर्म्ड पुलिस फोर्स के 9 जवानों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।

430 मेगावाट बिजली सप्लाई प्रभावित

बाढ़ से नेपाल के पनबिजली ढांचे, सड़कों और पुलों को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार करीब 430 मेगावाट बिजली की आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह देश की कुल 3.2 गीगावाट बिजली क्षमता के 12 प्रतिशत से अधिक है।

भोटे कोशी नदी का पानी नारायणी नदी के देवघाट क्षेत्र तक पहुंच गया है और जलस्तर बढ़ने की जानकारी सामने आई है।

हेलीकॉप्टर से नहीं हो पा रहा बचाव अभियान

नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। पुलिस, नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स की टीमें तैनात की गई हैं। सेना के दो हेलीकॉप्टर भी भेजे गए, लेकिन स्याफ्रुबेसी और तिमुरे में जलस्तर अधिक होने के कारण वे प्रभावित इलाकों में उतर नहीं सके।

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