Mumbai Drainage System: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में हर साल मानसून के दौरान जलभराव एक गंभीर समस्या बन जाता है। कुछ घंटों की तेज बारिश ही शहर की रफ्तार थाम देती है। सड़कें नदियों में बदल जाती हैं, लोकल ट्रेनें प्रभावित होती हैं और लाखों लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। इसके पीछे सिर्फ भारी बारिश नहीं, बल्कि कई तकनीकी, भौगोलिक और मानवीय कारण जिम्मेदार हैं।
150 साल पुराना ड्रेनेज सिस्टम बना बड़ी चुनौती
मुंबई के अधिकांश हिस्सों का ड्रेनेज सिस्टम ब्रिटिश शासन के दौरान 1860 के दशक में बनाया गया था। उस समय शहर की आबादी काफी कम थी और इसे प्रति घंटे लगभग 25 मिलीमीटर बारिश के हिसाब से डिजाइन किया गया था। आज जलवायु परिवर्तन के कारण कुछ ही घंटों में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो जाती है, जिसे यह पुराना सिस्टम संभाल नहीं पाता।
सात द्वीपों को जोड़कर बना था मुंबई शहर
आज की मुंबई कभी सात छोटे-छोटे द्वीपों का समूह हुआ करती थी। समय के साथ समुद्री खाड़ियों को भरकर इन द्वीपों को जोड़ा गया और शहर का विस्तार किया गया। इसके कारण कई इलाके जैसे सायन, दादर, कुर्ला और माहिम समुद्र तल के बेहद करीब या उससे भी नीचे स्थित हो गए, जिससे जलभराव का खतरा बढ़ गया।
हाई टाइड के दौरान और बिगड़ जाती है स्थिति
मुंबई में बारिश के समय हाई टाइड सबसे बड़ी चिंता बन जाती है। जब समुद्र में पानी का स्तर 12 से 14 फीट तक पहुंच जाता है, तब शहर का ड्रेनेज सिस्टम प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाता। कई बार समुद्र का पानी उल्टा नालों और सीवरों में घुसने लगता है, जिससे बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पाता और सड़कों पर जमा हो जाता है।
कंक्रीटीकरण ने खत्म कर दी पानी सोखने की क्षमता
शहर के बड़े हिस्से में कंक्रीट की सड़कें, फुटपाथ और इमारतें बन चुकी हैं। पहले बारिश का पानी जमीन में समा जाता था, लेकिन अब अधिकांश सतह पक्की होने के कारण पानी सीधे सड़कों पर जमा होने लगता है। इससे जलनिकासी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
मीठी नदी और नालों पर अतिक्रमण का असर
मुंबई में बारिश के पानी की निकासी के लिए मीठी नदी और कई प्राकृतिक नाले महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। लेकिन वर्षों में इनके किनारों पर अतिक्रमण, अवैध निर्माण और शहरी विकास ने जल प्रवाह को बाधित कर दिया। नतीजतन भारी बारिश के दौरान पानी की निकासी धीमी हो जाती है और बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं।
जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई मुश्किल
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक और कम समय में होने वाली बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं। मुंबई का पुराना बुनियादी ढांचा इस नई चुनौती के लिए तैयार नहीं है, जिससे हर मानसून में जलभराव की समस्या और गंभीर होती जा रही है।

