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शुक्रवार, जुलाई 17, 2026
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शेखर टुनाइट में बादशाह का खुलासा,फेम पर की फिलॉसफी वायरल, बोले- इसे एंजॉय करो, लेकिन खुद को मत खोओ

Entertainment News: रैपर बादशाह ने अपने गानों से देशभर में खास पहचान बनाई है। हाल ही में वह अभिनेता और होस्ट शेखर सुमन के चैट शो ‘शेखर टुनाइट’ में पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी सफलता, लोकप्रियता और कलाकार की जिम्मेदारियों को लेकर खुलकर बातचीत की। इस दौरान उनकी एक बात सबसे ज्यादा चर्चा में रही “फेम एक किराए का मकान है, जिसे एक दिन खाली करना ही पड़ता है।”

शुरुआत में सिर्फ क्रिएटिविटी मायने रखती थी

बादशाह ने बताया कि करियर की शुरुआत में उनका पूरा ध्यान सिर्फ अच्छे गाने लिखने और संगीत बनाने पर रहता था। उस समय उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनके शब्द लाखों लोगों तक पहुंचेंगे और उनका असर समाज पर भी पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में कलाकार सिर्फ अपनी रचनात्मकता को जीता है, लेकिन जैसे-जैसे लोकप्रियता बढ़ती है, वैसे-वैसे जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं।

हर इंसान की सोच अलग होती है

बादशाह का मानना है कि एक ही गाना अलग-अलग लोगों पर अलग असर डाल सकता है। जो बात किसी को प्रेरित करती है, वही किसी दूसरे को गलत भी लग सकती है। इसलिए एक सफल कलाकार को अपने शब्दों और संदेश के प्रति पहले से ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज के समय में किसी भी कलाकार की बात लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंचती है, इसलिए उसके हर शब्द की अहमियत बढ़ जाती है।

जिम्मेदारी निभाने में ही असली चुनौती

बादशाह ने कहा कि लोकप्रियता मिलने के बाद कलाकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी रचनात्मकता बनाए रखते हुए समाज के प्रति जिम्मेदार रहना है। उनके मुताबिक यही चुनौती कलाकार को बेहतर बनाती है और उसी में असली मजा भी छिपा होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति हर समय परेशानियों के बारे में सोचता रहेगा तो उसे हर तरफ मुश्किलें ही नजर आएंगी। बेहतर यही है कि इंसान अपने काम पर ध्यान दे और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े।

‘फेम किराए का मकान है’ क्यों कहा?

बातचीत के आखिर में बादशाह ने शोहरत को लेकर अपनी सोच साझा करते हुए कहा कि फेम हमेशा के लिए नहीं रहता। इसे अपनी पूरी पहचान बना लेना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि शोहरत का आनंद जरूर लेना चाहिए, लेकिन उस पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं होना चाहिए, क्योंकि एक दिन हर किसी को इसे छोड़ना पड़ता है। यही सोच इंसान को जमीन से जुड़े रहने में मदद करती है।

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