Trending News: Narendra Modi का हालिया इटली दौरा लगातार चर्चा में बना हुआ है। भले ही प्रधानमंत्री अब भारत लौट चुके हों, लेकिन उनके इस दौरे से जुड़ी खबरें और सोशल मीडिया पर बातचीत थमने का नाम नहीं ले रही हैं। खासकर इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni के साथ उनकी दोस्ताना बॉन्डिंग ने लोगों का ध्यान खूब खींचा है।
मेलोनी को मिले खास तोहफे, सोशल मीडिया में चर्चा
इस दौरे के दौरान पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को कई खास भारतीय उपहार भेंट किए। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में रहा “मेलोडी टॉफी” का पैकेट, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर मजेदार प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।इसके अलावा मोदी ने मेलोनी को मूगा सिल्क का एक खूबसूरत स्टोल भी गिफ्ट किया, जिसे असम का “गोल्डन सिल्क” कहा जाता है। यह उपहार न सिर्फ सांस्कृतिक महत्व रखता है बल्कि भारत की पारंपरिक कारीगरी को भी दुनिया के सामने पेश करता है।
क्या है मूगा सिल्क की खासियत?
मूगा सिल्क असम की ब्रह्मपुत्र घाटी की एक दुर्लभ और अनमोल विरासत मानी जाती है। इसे विशेष प्रकार के रेशम कीट से प्राप्त किया जाता है, जो सोम और सोमाली पौधों की पत्तियों पर निर्भर रहते हैं।इस सिल्क की सबसे बड़ी खासियत इसका प्राकृतिक सुनहरा रंग है, जिसमें किसी भी तरह के आर्टिफिशियल डाई का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यही कारण है कि यह पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता है।इसके अलावा मूगा सिल्क में नमी सोखने की क्षमता और यूवी-रेजिस्टेंट गुण भी पाए जाते हैं, जिससे यह दुनिया के मजबूत और टिकाऊ फाइबर्स में गिना जाता है।
कीमत और बाजार में मांग
मूगा सिल्क से साड़ी, शॉल और स्टोल जैसे कई प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। मौजूदा समय में इसका बाजार लगभग 200 करोड़ रुपये का बताया जाता है, जिसमें आगे कई गुना बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।मूगा सिल्क शॉल की कीमत आमतौर पर 3,500 रुपये से लेकर 38,000 रुपये तक होती है। कीमत इसकी शुद्धता और हैंडलूम क्वालिटी पर निर्भर करती है।
शिरुई लिली सिल्क स्टोल और अन्य उपहार
इस मौके पर पीएम मोदी ने मेलोनी को शिरुई लिली सिल्क स्टोल भी भेंट किया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी यूरोप यात्रा के दौरान हॉलैंड, नॉर्वे और स्वीडन के नेताओं को भी भारतीय हस्तशिल्प से जुड़े उपहार दिए। इनमें राजस्थान की ब्लू पॉटरी, मीनाकारी ज्वेलरी, कुंदन ईयररिंग्स और मधुबनी पेंटिंग जैसे पारंपरिक कला नमूने शामिल रहे।
भारत की सांस्कृतिक छवि को वैश्विक मंच
यह दौरा सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और पारंपरिक हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान देने वाला भी साबित हुआ।

