Viral News: कहते हैं कि अगर किसी चीज को पाने की सच्ची चाहत हो, तो रास्ते अपने आप निकल आते हैं। मुजफ्फरनगर के रहने वाले सुमित कुमार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। दोस्तों ने जब कार न होने को लेकर उनका मजाक उड़ाया, तो सुमित ने इसे दिल पर लेने के बजाय चुनौती के तौर पर लिया। उन्होंने तय किया कि स्पीति वैली जाना है, तो जाएंगे जरूर। फिर क्या था, उन्होंने अपनी कार नहीं बल्कि ई-रिक्शा उठाया और करीब 650 किलोमीटर के सफर पर निकल पड़े।
दोस्तों के सवाल ने बना दिया चुनौती
सुमित अपने दोस्तों के साथ स्पीति वैली घूमने की योजना बना रहे थे। जब उन्होंने दोस्तों से चलने के लिए पूछा तो जवाब मिला कि जाएंगे किससे, तुम्हारे पास तो कार भी नहीं है। दोस्तों की यह बात सुमित को जरूर चुभी, लेकिन उन्होंने अपना सपना छोड़ने के बजाय कुछ अलग करने का फैसला किया।
स्पीति वैली का सफर आसान नहीं माना जाता। यहां ऊंचे पहाड़, घुमावदार और चुनौतीपूर्ण सड़कें, कम आबादी वाले इलाके और कई जगहों पर सीमित सुविधाएं मिलती हैं। ऐसे रास्तों पर बड़ी गाड़ियां भी कभी-कभी परेशानी में पड़ जाती हैं। इसके बावजूद सुमित ने अपने इरादे को कमजोर नहीं पड़ने दिया।
ई-रिक्शा बना पहाड़ों की सवारी
सुमित ने अपनी रोजमर्रा की कमाई के साधन ई-रिक्शा को ही इस सफर की सवारी बना लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने करीब 650 किलोमीटर की दूरी लगभग तीन दिनों में तय की और स्पीति वैली पहुंच गए।
इस सफर की खास बात सिर्फ दूरी या समय नहीं है। सुमित के लिए ई-रिक्शा कोई लग्जरी वाहन नहीं, बल्कि परिवार का खर्च चलाने का जरिया है। इसी वाहन को लेकर उन्होंने पहाड़ों का रुख किया और अपने घूमने के सपने को पूरा किया।
साधन छोटे हों, सपने नहीं
सुमित की कहानी सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रही है। इसकी वजह साफ है,उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि किसी सपने को पूरा करने के लिए हमेशा महंगी कार या बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती।
हालांकि, पहाड़ी और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर किसी भी वाहन से लंबी यात्रा करने से पहले उसकी क्षमता, बैटरी, चार्जिंग की उपलब्धता, मौसम और स्थानीय सड़क परिस्थितियों की अच्छी तरह जांच जरूरी है।

