CJP on Noida Labourers Arrested: CJP के संस्थापक और प्रमुख संयोजक अभिजीत दीपके ने नोएडा में निजी कंपनियों के मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अपने जायज अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले नागरिकों के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई बंद होनी चाहिए।
दीपके ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि इस साल अप्रैल में करीब एक सप्ताह तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान लगभग 200 निजी कंपनियों के श्रमिकों को हिरासत में लिया गया था। उनके मुताबिक, कई मजदूरों को जमानत मिलने और पुलिस की पूछताछ पूरी होने से पहले लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा।
‘पाकिस्तान कनेक्शन’ पर भी उठाया सवाल
CJP प्रमुख ने एक खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कथित ‘पाकिस्तान कनेक्शन’ पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरों की मजदूरी में बढ़ोतरी की, लेकिन इसके बावजूद कई श्रमिक लंबे समय तक जेल में रहे।
दीपके ने दावा किया कि बाद में अदालत ने कई श्रमिकों को जमानत दी और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मजदूरों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया।
राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में बनेगी रणनीति
CJP की आगामी राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक को संगठन के लिए अहम माना जा रहा है। संगठन के मुताबिक, बैठक में 25 जुलाई को देशव्यापी आंदोलन वापस लिए जाने के बाद केंद्र सरकार की ओर से किए गए कथित वादों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
दीपके ने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त कराने के लिए दिए गए लिखित आश्वासनों पर अब तक सरकार की ओर से पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि नागरिकों और छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर संगठन आगे की रणनीति तय करेगा।
सुप्रीम कोर्ट में एफआईआर सूची को लेकर दावा
CJP ने सुप्रीम कोर्ट में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। संगठन के मुताबिक, 18 अगस्त की सुनवाई में शीर्ष अदालत ने देशभर में दर्ज मामलों की एक संयुक्त सूची प्रस्तुत करने को कहा था।
राष्ट्रीय सह-संयोजक सौरव दास और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी सरकार के रुख पर चिंता जताई। संगठन का कहना है कि सरकार के साथ बातचीत और लिखित आश्वासनों के आधार पर आंदोलन स्थगित किया गया था, इसलिए अब उन आश्वासनों के पालन की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

