केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े करोड़ों कर्मचारियों के लिए नई एम्प्लॉईज पेंशन स्कीम (EPS) 2026 लागू कर दी है। यह योजना 29 जून 2026 से प्रभावी हो चुकी है और इसने पुरानी EPS-1995 तथा 1971 फैमिली पेंशन स्कीम की जगह ले ली है। नई स्कीम लागू होने के बाद कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें कितनी पेंशन मिलेगी और क्या नियम बदले हैं।
10 साल की नौकरी अब भी जरूरी
नई EPS 2026 में पेंशन पाने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की पेंशन योग्य सेवा की शर्त पहले की तरह बरकरार रखी गई है। यदि कर्मचारी ने 10 साल की सेवा पूरी कर ली है तो वह 58 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद नियमित मासिक पेंशन का पात्र होगा। वहीं, 50 वर्ष की आयु के बाद निर्धारित नियमों के तहत कम राशि के साथ अर्ली पेंशन का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
10 साल से कम सेवा पर क्या होगा?
अगर किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सेवा 10 वर्ष से कम है तो उसे नियमित मासिक पेंशन नहीं मिलेगी। ऐसे कर्मचारियों के पास दो विकल्प होंगे। पहला, वे EPS में जमा राशि निकाल सकते हैं। दूसरा, वे स्कीम सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं, जिससे भविष्य में दूसरी नौकरी के दौरान पिछली सेवा जोड़कर पेंशन की पात्रता पूरी की जा सकेगी।
ऐसे तय होगी आपकी पेंशन
EPFO के अनुसार पेंशन की गणना का फॉर्मूला पहले जैसा ही रहेगा।
मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70
यहां पेंशन योग्य वेतन का मतलब अंतिम 60 महीनों के औसत मूल वेतन और महंगाई भत्ते (DA) से है। अधिकांश कर्मचारियों के लिए इसकी अधिकतम सीमा फिलहाल 15,000 रुपये निर्धारित है।
न्यूनतम पेंशन में फिलहाल कोई बदलाव नहीं
नई EPS 2026 लागू होने के बावजूद न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपये ही रहेगी। यदि किसी कर्मचारी की गणना इससे कम बैठती है, तब भी उसे कम से कम 1,000 रुपये प्रति माह पेंशन मिलेगी। हालांकि विभिन्न पेंशनर संगठन लंबे समय से न्यूनतम पेंशन को 5,000 से 7,500 रुपये तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई नई घोषणा नहीं की गई है।

