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शनिवार, जुलाई 11, 2026
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अब नहीं बिकेंगे रेड बुल और स्टिंग, राजस्थान में 8 एनर्जी ड्रिंक ब्रांड पर लगी रोक,जानिए राजस्थान सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने राज्य में बिकने वाले कई लोकप्रिय एनर्जी ड्रिंक ब्रांड्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने रेड बुल, स्टिंग समेत 8 एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री, भंडारण और प्रचार पर रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी लागू होगा। इस फैसले का उद्देश्य उपभोक्ताओं को भ्रामक दावों से बचाना और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है।

5 लाख से ज्यादा कैन जब्त, कई शहरों में चला अभियान

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने पिछले एक सप्ताह के दौरान राजस्थान के 25 से अधिक शहरों में विशेष अभियान चलाया। इस दौरान 5 लाख से अधिक एनर्जी ड्रिंक के कैन और बोतलें जब्त की गईं। अधिकारियों ने दुकानदारों और वितरकों को चेतावनी दी है कि भविष्य में इन उत्पादों की बिक्री या भंडारण करते पाए जाने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भ्रामक विज्ञापनों पर उठे सवाल

जांच में पाया गया कि कई कंपनियां अपने उत्पादों के लेबल पर “एनर्जी ड्रिंक”, “शरीर और मन को स्फूर्ति प्रदान करता है” जैसे दावे कर रही थीं। खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि ऐसे दावों के समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के अनुसार इस तरह के दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले माने जा सकते हैं।

विशेषज्ञों ने क्यों जताई चिंता?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन, अधिक मात्रा में शुगर, टॉरिन और विटामिन-बी जैसे तत्व होते हैं। ये कुछ समय के लिए शरीर और दिमाग को सक्रिय महसूस करा सकते हैं, लेकिन लगातार सेवन से कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। खासकर बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इनका अधिक सेवन नुकसानदायक माना जाता है।

किन ब्रांड्स पर लगी है रोक?

खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिन प्रमुख ब्रांड्स पर कार्रवाई की है उनमें रेड बुल, स्टिंग, हेल एनर्जी, कैंपा एनर्जी, मॉन्स्टर एनर्जी, आफ्टर शॉक, ट्रॉपिकाना और एड्रेनालिन रश शामिल हैं। फिलहाल राजस्थान में इन ब्रांड्स की बिक्री, भंडारण और प्रचार पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और सही जानकारी को प्राथमिकता देते हुए आगे भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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