Hydrogen Train Started: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी। रेलवे ने इस ट्रेन का किराया आम यात्रियों की पहुंच में रखते हुए 5 रुपये से 26 रुपये तक निर्धारित किया है। इस परियोजना को भारतीय रेलवे के हरित परिवहन मिशन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ परियोजना का हिस्सा
यह ट्रेन भारतीय रेलवे की ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत शुरू की गई है। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो रेल परिवहन में हाइड्रोजन ईंधन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। इस सूची में जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देश शामिल हैं।
कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?
हाइड्रोजन ट्रेन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रासायनिक संयोजन से बिजली उत्पन्न की जाती है, जिससे ट्रेन संचालित होती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है, इसलिए यह पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल मानी जाती है। पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में यह तकनीक कार्बन उत्सर्जन को लगभग शून्य कर देती है।
जींद में तैयार हुई विशेष सुविधा
ट्रेन संचालन के लिए जींद में अत्याधुनिक हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग स्टेशन विकसित किया गया है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद यहां हाइड्रोजन गैस के सुरक्षित भंडारण और वितरण की व्यवस्था की गई है। साथ ही हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम, स्टैंडबाय कंप्रेसर और अन्य तकनीकी सुविधाएं भी स्थापित की गई हैं।
स्वच्छ परिवहन की दिशा में बड़ा कदम
भारतीय रेलवे का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भविष्य में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बनेंगी। यह परियोजना ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ भारत के नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद करेगी। रेलवे के लिए यह तकनीकी और पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

