spot_img
बुधवार, जुलाई 29, 2026
-विज्ञापन-

More From Author

Passport Renewal: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला,सिर्फ FIR दर्ज होने पर नहीं रुकेगा पासपोर्ट रिन्यूअल,

Passport Renewal: पासपोर्ट बनवाने या रिन्यू कराने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत सामने आई है। आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज होने के आधार पर उसका पासपोर्ट जारी करने या नवीनीकरण करने से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब तक किसी आपराधिक मामले में संबंधित अदालत औपचारिक रूप से संज्ञान नहीं लेती, तब तक उसे पासपोर्ट कानून के तहत लंबित न्यायिक कार्यवाही नहीं माना जाएगा।

16 वर्षीय युवक की याचिका पर आया फैसला

यह फैसला एक 16 वर्षीय नाबालिग की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। युवक ने अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। पुलिस सत्यापन के दौरान अधिकारियों को पता चला कि उसका नाम एक आपराधिक मामले में दर्ज है। इसके बाद क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) ने स्पष्टीकरण मांगते हुए उसका पासपोर्ट रिन्यू करने से इनकार कर दिया।

इस निर्णय को चुनौती देते हुए युवक ने हाई कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मामले में अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है और न ही किसी अदालत ने उस पर संज्ञान लिया है।

अदालत ने समझाया कानून का दायरा

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सुब्बा रेड्डी सट्टी ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6(2)(f) की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि केवल FIR दर्ज होना यह साबित नहीं करता कि मामला अदालत में लंबित है। जब तक मजिस्ट्रेट या सक्षम अदालत मामले पर संज्ञान नहीं लेती, तब तक पासपोर्ट रोकने का कानूनी आधार नहीं बनता।

अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय कानून का मूल सिद्धांत है कि किसी व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक उसका दोष अदालत में साबित न हो जाए। केवल आरोपी होने के आधार पर उसके अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता।

विदेश यात्रा भी मौलिक स्वतंत्रता का हिस्सा

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि विदेश यात्रा का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। इस अधिकार पर बिना पर्याप्त कानूनी आधार के प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।

पासपोर्ट अधिकारी को दिए निर्देश

अदालत ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया कि वह पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 के प्रावधानों के अनुसार आवेदन पर दोबारा विचार करे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि केवल FIR के आधार पर किसी नागरिक के पासपोर्ट आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।

 

Latest Posts

-विज्ञापन-

Latest Posts