Indian Railways Rules: रेलवे स्टेशन पर परिवार या दोस्तों को छोड़ने जाना आम बात है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी को सिर्फ अपने परिवार को विदा करने के कारण जुर्माना भरना पड़ सकता है? मुंबई के कल्याण जंक्शन रेलवे स्टेशन पर ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसने रेलवे नियमों और यात्रियों की परेशानियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।यह घटना यात्री आदित्य सिंह चौहान के साथ हुई, जिन्हें प्लेटफॉर्म टिकट की वैधता समाप्त होने के बाद लगभग ₹520 का जुर्माना भरना पड़ा। अब यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
ट्रेन की देरी बनी परेशानी की वजह
जानकारी के अनुसार, आदित्य सिंह चौहान अपने परिवार को बिहार जाने वाली 11061 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-जयनगर एक्सप्रेस (पवन एक्सप्रेस) में बैठाने के लिए कल्याण स्टेशन पहुंचे थे।उन्होंने दोपहर 11:58 बजे ₹20 का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म टिकट खरीदा था। ट्रेन निर्धारित समय पर आने वाली थी, लेकिन परिचालन कारणों से लगातार लेट होती गई। देखते ही देखते ट्रेन की देरी 5 से 6 घंटे तक पहुंच गई।परिवार के साथ इंतजार करते हुए आदित्य स्टेशन पर ही बने रहे। इस दौरान उनका प्लेटफॉर्म टिकट अपनी निर्धारित समय सीमा पूरी कर चुका था।
टिकट एक्सपायर होते ही लगा जुर्माना
जब आखिरकार ट्रेन स्टेशन पर पहुंची और परिवार को विदा करने के बाद आदित्य बाहर निकलने लगे, तब टिकट जांच कर्मचारियों ने उनका टिकट चेक किया।जांच में पाया गया कि उनका प्लेटफॉर्म टिकट अब वैध नहीं था। रेलवे नियमों के अनुसार एक्सपायर प्लेटफॉर्म टिकट के साथ स्टेशन परिसर में मौजूद रहने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इसी आधार पर उनसे लगभग ₹500 से ₹520 तक का फाइन वसूला गया।
यात्री ने उठाए कई सवाल
आदित्य का कहना है कि अगर उन्हें पहले से ट्रेन की वास्तविक देरी की जानकारी मिल जाती तो वे नया प्लेटफॉर्म टिकट खरीद लेते। लेकिन परिवार, बच्चों और सामान के साथ स्टेशन छोड़कर बार-बार टिकट लेना उनके लिए आसान नहीं था।उन्होंने सवाल उठाया कि जब ट्रेन की देरी रेलवे की वजह से हुई थी, तो ऐसी स्थिति में यात्रियों को दंडित करना कितना उचित है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने रेलवे की कार्रवाई को कठोर बताया और कहा कि ट्रेन की देरी के लिए यात्रियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।वहीं कुछ लोगों का मानना है कि नियम सभी के लिए समान होते हैं और प्लेटफॉर्म टिकट की समय सीमा का पालन जरूरी है।
रेलवे ने क्या कहा?
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी यात्री को ऐसी स्थिति में शिकायत है तो वह रेलमदद पोर्टल या हेल्पलाइन 139 के माध्यम से अपनी बात दर्ज करा सकता है।फिलहाल जुर्माने को रद्द करने को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि इस घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है,क्या प्लेटफॉर्म टिकट की वैधता ट्रेन की वास्तविक देरी से जुड़नी चाहिए या फिर मौजूदा नियमों को ही सख्ती से लागू किया जाना चाहिए?

