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शुक्रवार, जुलाई 3, 2026
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साइबर ठगी के इस नए ने फ्रॉड ने बढ़ाई E-Rickshaw चालकों की चिंता, जानिए कैसे हो रही ठगी

E-Rickshaw BAT-BMS App Fraud: उत्तर प्रदेश से शुरू हुई ई-रिक्शा चालकों की एक नई परेशानी अब कई राज्यों तक पहुंच गई है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और बिजनौर के बाद उत्तराखंड तथा मध्य प्रदेश से भी ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि चलते-चलते ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाते हैं। ड्राइवरों का आरोप है कि कुछ शरारती तत्व मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से छेड़छाड़ कर वाहन को रिमोट तरीके से लॉक कर देते हैं और फिर उसे चालू करने के बदले पैसे वसूलते हैं।

कई राज्यों में सामने आए मामले

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई ई-रिक्शा चालकों ने बताया कि बिना किसी तकनीकी खराबी के वाहन अचानक सड़क पर रुक जाता है। कुछ मामलों में यात्रियों को बीच रास्ते उतरना पड़ा। बिजनौर जिले के नगीना, किरतपुर और बिजनौर शहर में भी 100 से अधिक ई-रिक्शों के अचानक बंद होने की शिकायतें दर्ज हुई हैं। चालकों का आरोप है कि वाहन दोबारा चालू करने के लिए 200 रुपये तक की मांग की जाती है।

उज्जैन में जांच तेज

मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी इसी तरह के मामले सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि कुछ लोग सुनसान इलाकों में ई-रिक्शा बंद कर खुद तकनीकी विशेषज्ञ बनकर पहुंचते थे और वाहन चालू करने के नाम पर 200 से 300 रुपये वसूलते थे। पुलिस ने एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।

क्या है BAT-BMS ऐप?

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सस्ते ई-रिक्शों में चीन निर्मित स्मार्ट लिथियम बैटरियों के साथ ब्लूटूथ आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) लगा होता है। सोशल मीडिया पर वायरल दावों के मुताबिक, ‘BAT-BMS’ नाम के मोबाइल ऐप के जरिए यदि बैटरी में पर्याप्त सुरक्षा नहीं है तो उससे कनेक्ट होकर पावर सप्लाई बंद की जा सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सभी बैटरियों को इस तरीके से नियंत्रित करना संभव नहीं है। यह संबंधित बैटरी के सुरक्षा फीचर्स और तकनीकी संरचना पर निर्भर करता है।

जांच और कार्रवाई की मांग

लगातार बढ़ती शिकायतों के बीच ई-रिक्शा चालक संगठनों ने साइबर सेल, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन से मामले की गहन जांच कराने की मांग की है। साथ ही बैटरी निर्माताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और कथित डिजिटल ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग उठाई जा रही है।

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