Credit Card Trap: आज के समय में क्रेडिट कार्ड लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन शॉपिंग हो, यात्रा का खर्च हो या अचानक आई कोई वित्तीय जरूरत, क्रेडिट कार्ड तुरंत मदद करता है। लेकिन इसकी सुविधा के साथ एक बड़ा जोखिम भी जुड़ा हुआ है, जिसे कई लोग नजरअंदाज कर देते हैं। यह जोखिम है ‘Minimum Due’ का जाल।
क्या होता है Minimum Due?
जब क्रेडिट कार्ड का बिल आता है, तो उसमें दो रकम दिखाई देती हैं। पहली होती है Total Amount Due और दूसरी Minimum Amount Due। आमतौर पर Minimum Due कुल बकाया राशि का लगभग 5 प्रतिशत होता है। कई लोग सोचते हैं कि सिर्फ Minimum Due भर देने से उनकी जिम्मेदारी पूरी हो गई, जबकि असलियत इससे काफी अलग है।
क्यों खतरनाक है सिर्फ Minimum Due भरना?
Minimum Due भरने से आप लेट पेमेंट फीस और तत्काल क्रेडिट स्कोर नुकसान से बच सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी बकाया राशि खत्म हो गई। बची हुई रकम पर बैंक तुरंत ब्याज लगाना शुरू कर देता है।
क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर अक्सर 3 से 4 प्रतिशत प्रति माह होती है। सालाना आधार पर यह 36 से 45 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि वित्तीय विशेषज्ञ इसे सबसे महंगे कर्जों में से एक मानते हैं।
एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए आपके क्रेडिट कार्ड का बिल 50,000 रुपये है। आपने केवल 2,500 रुपये Minimum Due के रूप में जमा किए। अब बाकी 47,500 रुपये पर हर महीने ब्याज जुड़ता रहेगा। यदि आप लगातार ऐसा करते रहे, तो कुछ ही महीनों में आपका बकाया काफी बढ़ सकता है।
खत्म हो जाता है Interest-Free Period
क्रेडिट कार्ड का एक बड़ा फायदा Interest-Free Period होता है, जो 45 से 50 दिनों तक मिल सकता है। लेकिन जैसे ही आप पूरा बिल चुकाने के बजाय केवल Minimum Due भरते हैं, यह सुविधा समाप्त हो जाती है।इसके बाद कार्ड से किया गया हर नया खर्च पहले दिन से ही ब्याज के दायरे में आ जाता है। इससे आपका कर्ज और तेजी से बढ़ने लगता है।
Debt Trap से कैसे बचें?
हमेशा पूरा बिल भरें
जहां तक संभव हो, हर महीने Total Amount Due का भुगतान करें।
EMI विकल्प का इस्तेमाल करें
अगर बड़ी राशि चुकाना मुश्किल हो, तो बैंक की EMI सुविधा चुन सकते हैं। इसकी ब्याज दर आमतौर पर क्रेडिट कार्ड ब्याज से कम होती है।
खर्चों पर नियंत्रण रखें
क्रेडिट कार्ड का उपयोग केवल जरूरी खर्चों के लिए करें और उतना ही खर्च करें, जितना आप समय पर चुका सकें। ऑफर्स और डिस्काउंट के लालच में अनावश्यक खरीदारी से बचें। अपनी आय और बजट को ध्यान में रखकर खर्च करने से कर्ज बढ़ने का खतरा कम होता है और वित्तीय स्थिति मजबूत रहती है।

