Noida News: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा वन में रविवार सुबह उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक गैस पाइपलाइन अचानक फट गई। तेज आवाज के साथ गैस का रिसाव शुरू होते ही आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोगों को घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित दूरी पर जाने की सलाह दी गई। राहत की बात यह रही कि करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद रिसाव पर पूरी तरह काबू पा लिया गया और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
खोदाई के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, सेक्टर डेल्टा वन के सी ब्लॉक में मकान संख्या 121 के सामने पाइपलाइन से संबंधित कार्य चल रहा था। इसी दौरान खुदाई कर रही मशीन की चपेट में गैस पाइपलाइन आ गई और वह क्षतिग्रस्त होकर फट गई। पाइपलाइन फटते ही तेज दबाव के साथ गैस निकलने लगी, जिससे पूरे इलाके में गैस की गंध फैल गई।
लोगों में मचा हड़कंप
गैस रिसाव की आवाज और बदबू से स्थानीय निवासी घबरा गए। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत लोगों को सतर्क किया और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। स्थानीय निवासी प्रमोद भाटी के अनुसार, स्थिति को देखते हुए कई लोगों ने एहतियातन अपने घरों से बाहर निकलना ही बेहतर समझा।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम और गैस विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। इलाके को सुरक्षित बनाने के लिए तत्काल कदम उठाए गए।
मुख्य गैस लाइन बंद कर रोका गया रिसाव
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने मुख्य गैस लाइन को बंद करने का फैसला लिया। यह काम आसान नहीं था, क्योंकि रिसाव लगातार जारी था। करीब ढाई घंटे की मेहनत के बाद मुख्य वाल्व बंद किया गया, जिसके बाद गैस का रिसाव पूरी तरह रुक सका।
रिसाव बंद होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन अधिकारियों ने एहतियात बरतते हुए कुछ समय तक गैस चूल्हा, माचिस, लाइटर और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं का उपयोग न करने की सलाह दी।
मरम्मत के बाद बहाल हुई आपूर्ति
गैस विभाग की टीम ने क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत की और लीकेज टेस्ट भी किया। सभी सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही गैस आपूर्ति दोबारा शुरू की गई। अधिकारियों ने पुष्टि की कि अब स्थिति पूरी तरह सामान्य और सुरक्षित है।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण और खुदाई कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर चिंता जताई है। निवासियों का कहना है कि किसी भी खुदाई से पहले भूमिगत पाइपलाइन और अन्य सेवाओं की सटीक मैपिंग की जानी चाहिए। साथ ही, ऐसे क्षेत्रों में अलर्ट सिस्टम और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी अनिवार्य किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

