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मंगलवार, अगस्त 25, 2026
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इकाना स्टेडियम में युवा खिलाड़ियों ने रणजी टीमें बनाने की मांग को ले कर किया प्रदर्शन,सर्कार के फैसले का इंतज़ार

Uttar Pradesh में क्रिकेट के बढ़ते दायरे और युवा खिलाड़ियों को ज्यादा मौके देने की मांग अब तेज होती जा रही है। रविवार को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में ‘जेन जी’ क्रिकेट खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों ने प्रदर्शन कर उत्तर प्रदेश में तीन रणजी क्रिकेट टीमें बनाने की मांग उठाई।प्रदर्शन में पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के करीब 250 युवा खिलाड़ी और उनके माता-पिता शामिल हुए।

युवा क्रिकेटरों ने क्यों उठाई तीन टीमों की मांग?

उत्तर प्रदेश क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ पूर्वांचल के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में खिलाड़ियों ने कहा कि आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा राज्य है। ऐसे में यहां सिर्फ एक रणजी टीम होने से बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते।

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि प्रदेश में तीन अलग-अलग क्रिकेट संघ बनाए जाएं और तीनों की अपनी रणजी टीमें हों। इससे पूर्वांचल, मध्य उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं।

‘यूपी जैसे बड़े राज्य में तीन टीमें होनी चाहिए’

क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह ने कहा कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में खिलाड़ियों की संख्या भी बहुत अधिक है। ऐसे में तीन रणजी टीमें बनाए जाने से ज्यादा युवाओं को घरेलू क्रिकेट में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहले उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में खिलाड़ियों को ज्यादा अवसर देने के लिए एक से अधिक रणजी टीमों की जरूरत की बात कर चुके हैं।

खिलाड़ियों को मिलेंगे ज्यादा मौके

युवा खिलाड़ियों का मानना है कि तीन रणजी टीमें बनने से चयन का दायरा बढ़ेगा और ज्यादा क्रिकेटरों को राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।

फिलहाल उत्तर प्रदेश की एक ही रणजी टीम है, जिसके लिए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों के लिए टीम बनने से स्थानीय प्रतिभाओं को बेहतर मंच मिल सकता है।

अब बीसीसीआई के फैसले पर नजर

उत्तर प्रदेश में तीन रणजी टीमें बनाने की मांग लंबे समय से अलग-अलग स्तरों पर उठती रही है। अब युवा खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों के प्रदर्शन के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

अब नजर इस बात पर है कि बीसीसीआई और संबंधित क्रिकेट प्रशासन इस मांग पर क्या फैसला लेते हैं। अगर मांग स्वीकार होती है तो उत्तर प्रदेश के बड़ी संख्या में युवा क्रिकेटरों के लिए घरेलू क्रिकेट में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं।

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