ईडी ने इस मामले में 2 सितंबर को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और एनसीआर में कुल 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
छापेमारी में नकदी और डिजिटल उपकरण जब्त
तलाशी के दौरान करीब 1.03 करोड़ रुपये नकद, खाता-बही, बैंक दस्तावेज और कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। जांच एजेंसी ने आठ बैंक खातों को भी फ्रीज किया है। ईडी के मुताबिक, इन एप का इस्तेमाल खास तौर पर उन वाहनों से टोल वसूलने के लिए किया जाता था, जिन पर फास्टैग उपलब्ध नहीं था।
जांच में ऐसे डिजिटल रिकॉर्ड भी मिलने का दावा किया गया है, जिनमें करोड़ों रुपये की अनधिकृत टोल रसीदों का विवरण मौजूद था।
फर्जी रसीद बनाकर NHAI से जानकारी छिपाने का आरोप
ईडी ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत केस दर्ज किया है। जांच उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में जनवरी 2025 में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। यह एफआईआर अतरैला शिव गुलाम टोल प्लाजा समेत अन्य टोल प्लाजा पर कथित धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़ी थी।
शिकायत के अनुसार, अवैध एप के जरिए फर्जी टोल रसीदें तैयार की गईं और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के आधिकारिक सिस्टम में वसूली की वास्तविक जानकारी छिपाई गई। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने का आरोप है।
बिचौलियों और टोल कंपनियों की भूमिका की जांच
ईडी की जांच में कथित अवैध वसूली के नेटवर्क में बिचौलियों और टोल संग्रह के लिए नियुक्त कंपनियों की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े लोगों और पैसों के लेन-देन की जांच कर रही है।