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Thursday, April 30, 2026
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Aadhaar Card Update: आधार कार्ड से जुड़े इस नए नियम का आप पर क्या होगा असर? आइए जानते हैं

Aadhaar Card Update: अगर आप आधार कार्ड को अपनी जन्मतिथि (Date of Birth) का पक्का प्रमाण मानते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। Unique Identification Authority of India (UIDAI) ने स्पष्ट किया है कि अब आधार कार्ड को डेट ऑफ बर्थ (DOB) के वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। आधार केवल पहचान और पते का प्रमाण है, न कि उम्र या जन्मतिथि का आधिकारिक दस्तावेज।

UIDAI की इस सफाई के बाद उन लोगों के लिए सतर्क रहने की जरूरत है जो स्कूल एडमिशन, सरकारी नौकरी, पासपोर्ट, पेंशन या अन्य दस्तावेजी प्रक्रियाओं में आधार को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं।

क्यों नहीं माना जाएगा आधार DOB का प्रूफ?

UIDAI के अनुसार, आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि हमेशा सत्यापित (Verified) नहीं होती। कई बार लोग नामांकन के समय अनुमानित उम्र या स्व-घोषित (Declared) जन्मतिथि दर्ज करवा देते हैं। ऐसे मामलों में आधार में दर्ज DOB कानूनी रूप से अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

UIDAI ने कहा कि आधार का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना है, न कि उसकी जन्मतिथि को प्रमाणित करना। आधार एक्ट 2016 में भी इसे जन्मतिथि के आधिकारिक दस्तावेज के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।

कौन से दस्तावेज होंगे वैध?

अगर आपको अपनी जन्मतिथि साबित करनी है, तो UIDAI और सरकारी एजेंसियों के अनुसार कुछ दस्तावेज वैध माने जाएंगे। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट (SSLC), पासपोर्ट और किसी सरकारी अधिकारी द्वारा जारी जन्मतिथि प्रमाण पत्र शामिल हैं।

ये दस्तावेज अधिक भरोसेमंद माने जाते हैं क्योंकि इनमें दर्ज जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर होती है।

किन कामों पर पड़ेगा असर?

आज के समय में आधार कार्ड लगभग हर काम में इस्तेमाल होता है। बैंक खाता खोलने से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, सिम कार्ड लेने, लाइसेंस बनवाने और KYC तक आधार जरूरी हो गया है। लेकिन अगर किसी प्रक्रिया में जन्मतिथि का आधिकारिक प्रमाण मांगा जाएगा, तो सिर्फ आधार दिखाना पर्याप्त नहीं होगा।

ऐसे में अगर आपके पास जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल सर्टिफिकेट नहीं है, तो भविष्य में दिक्कतें आ सकती हैं।

नया नियम नहीं, पुरानी व्यवस्था की सफाई

UIDAI ने साफ किया है कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि पहले से लागू व्यवस्था को और स्पष्ट किया गया है। आधार हमेशा से पहचान और पते के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल होता आया है। अब इसे लेकर भ्रम दूर करने के लिए यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है।

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