Technology: गैजेट्स की दुनिया से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। यदि आप नया स्मार्टफोन या लैपटॉप खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपको अपनी जेब और ढीली करनी पड़ सकती है। वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप्स (Memory Chips) की भारी कमी के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की कीमतों में लगी आग जल्द बुझती नहीं दिख रही है।
21 अप्रैल, 2026 टेक बाजार में पिछले कुछ महीनों से मची उथल-पुथल अब एक गंभीरGadjet संकट का रूप ले चुकी है। भारत समेत वैश्विक बाजार में स्मार्टफोन और लैपटॉप की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ताज़ा रिपोर्ट्स की मानें तो यह ‘चिप शॉर्टेज’ (Chip Shortage) महज कुछ महीनों की बात नहीं है, बल्कि यह संकट अगले साल और उसके बाद भी जारी रह सकता है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
मेमोरी चिप्स की कमी के पीछे सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग को माना जा रहा है।
* डेटा सेंटर की प्राथमिकता: सैमसंग, एसके हाइनिक्स और माइक्रोन जैसी दिग्गज कंपनियां अब सामान्य मोबाइल चिप्स के बजाय एआई डेटा सेंटर्स के लिए हाई-एंड चिप्स बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
* डिमांड और सप्लाई का अंतर: ये तीन कंपनियां बाजार का 90% हिस्सा नियंत्रित करती हैं। भारी निवेश के बावजूद ये कंपनियां फिलहाल केवल 60 प्रतिशत मांग ही पूरी कर पा रही हैं।
* युद्ध का असर: ईरान और मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध ने सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे लॉजिस्टिक्स और प्रोडक्शन की लागत बढ़ गई है।
कब तक बना रहेगा संकट?
चिप निर्माता कंपनियों के प्रोडक्शन प्लान को देखते हुए विशेषज्ञों का अनुमान है कि स्थिति सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा:
सैमसंग (Samsung): कंपनी इस साल नया प्लांट शुरू कर रही है, लेकिन फुल-स्केल प्रोडक्शन 2027 से पहले संभव नहीं है।
एसके हाइनिक्स: इनके नए प्लांट में भी काम अगले साल ही गति पकड़ पाएगा।
माइक्रोन: कंपनी 2027 में एक नया फैब्रिकेशन प्लांट शुरू करने की तैयारी में है।
जानकारों का मानना है कि मेमोरी चिप का यह संकट 2027-28 तक पूरी तरह दूर नहीं होगा। तब तक कंपनियों को महंगी चिप खरीदनी पड़ेगी, जिसका सीधा बोझ ग्राहकों पर डाला जाएगा।

