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शनिवार, नवम्बर 7, 2026
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जिस थाने से इंसाफ की उम्मीद थी, वहीं हुई दरिंदगी, 11 साल बाद मिली दोषियों को सजा

Uttar Pradesh News:पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की उम्मीद लेकर थाने पहुंची एक महिला ने कभी नहीं सोचा होगा कि उसे ऐसी मुश्किल का सामना करना पड़ेगा। आरोप था कि तत्कालीन थाना प्रभारी के सरकारी आवास में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इस घटना के बाद महिला ने इंसाफ के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। अब करीब 11 साल बाद अदालत ने दो पुलिसकर्मियों को 20-20 साल की कठोर कैद सुनाई है।

दोनों पुलिसकर्मियों को 20-20 साल की सजा

फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के न्यायाधीश प्रबोध कुमार वर्मा ने तत्कालीन थाना प्रभारी और सेवानिवृत्त सीओ बृजमोहन यादव तथा तत्कालीन एसएसआई एवं वर्तमान इंस्पेक्टर वेदपाल सिंह उर्फ वेगपाल सिंह को दोषी ठहराया।

दोनों को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में 20-20 साल की कठोर कैद और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। वहीं, धमकी देने के मामले में पांच-पांच साल की साधारण कैद और 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। दोनों मामलों की सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

2015 में थाने पहुंची थी महिला

यह मामला 6 अगस्त 2015 का है। महिला अपने पति को पुलिस हिरासत से छुड़ाने के लिए देवबंद थाने पहुंची थी। आरोप है कि इसी दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी के सरकारी आवास में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

महिला ने स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के आदेश पर 7 नवंबर 2017 को चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई।

500 से ज्यादा तारीखों के बाद मिला न्याय

इस मामले में पीड़िता को इंसाफ के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। करीब 11 साल तीन महीने चली कानूनी प्रक्रिया में 500 से अधिक तारीखें पड़ीं और आठ गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

पीड़िता के अधिवक्ता राजीव तोमर के मुताबिक, महिला ने 30 नवंबर 2015 को तत्कालीन एसएसपी को रजिस्टर्ड डाक से भी शिकायत भेजी थी। बाद में सीबीसीआईडी की अंतिम रिपोर्ट को चुनौती देते हुए पीड़िता ने प्रोटेस्ट पिटीशन और परिवाद के जरिए अपनी लड़ाई जारी रखी।

परिवार को भी झेलनी पड़ीं मुश्किलें

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुसार, मुकदमे की पैरवी के दौरान परिवार पर करीब दस बार हमले और मारपीट की घटनाएं हुईं। परिवार के खिलाफ पांच से अधिक मुकदमे दर्ज होने का आरोप भी लगाया गया।

फैसले वाले दिन परिवार ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस से संपर्क करने की कोशिश के बावजूद मदद नहीं मिल सकी। इसके बाद परिवार रास्ता बदलकर सहारनपुर कचहरी पहुंचा।

करीब 11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया यह फैसला पीड़िता के संघर्ष का अहम पड़ाव माना जा रहा है।

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