क्या है अन्नपूर्णा रसोई योजना?
अन्नपूर्णा रसोई योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी जरूरतमंद को भूखा न रहना पड़े। इसके तहत लोगों को केवल 5 रुपये में पौष्टिक भोजन की थाली उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, सुबह के नाश्ते के लिए सिर्फ 3 रुपये खर्च करने होंगे।
भोजन की थाली में दाल, चावल, रोटी और मौसमी सब्जियां शामिल होंगी। सरकार का जोर केवल सस्ता खाना उपलब्ध कराने पर ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और साफ-सफाई बनाए रखने पर भी रहेगा।
यूपी के इन 18 जिलों में पहले शुरू होगी योजना
सरकार ने शुरुआत में प्रदेश के सभी 18 मंडल मुख्यालय वाले जिलों में अन्नपूर्णा रसोई खोलने की योजना बनाई है। इनमें शामिल हैं:लखनऊ,कानपुर,वाराणसी,गोरखपुर,अयोध्या,मेरठ,बरेली,मुरादाबाद,आगरा,अलीगढ़,आजमगढ़,झांसी,बस्ती,गोंडा,बांदा,मिर्जापुर,सहारनपुर,प्रयागराज।
इन शहरों में बड़ी संख्या में मजदूर, छात्र, किसान और दूसरे जिलों से आने वाले लोग रहते हैं। ऐसे में सस्ती भोजन व्यवस्था उनके लिए काफी मददगार साबित हो सकती है।
कहां खोले जाएंगे अन्नपूर्णा भोजनालय?
योजना के तहत भोजनालय ऐसी जगहों पर खोलने की तैयारी है, जहां जरूरतमंदों की आवाजाही अधिक रहती है। इनमें अनाज मंडियां, श्रमिक अड्डे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सरकारी अस्पतालों के आसपास के इलाके शामिल हैं।
इससे किसानों को मंडियों में फसल बेचने के दौरान भोजन के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। वहीं, रोजाना काम की तलाश में निकलने वाले मजदूर भी कम कीमत में खाना खा सकेंगे।
साफ-सफाई और खाने की गुणवत्ता पर रहेगा जोर
अन्नपूर्णा रसोई को आधुनिक और स्वच्छ कैंटीन के रूप में विकसित करने की तैयारी है। भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विशेष दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। कोशिश होगी कि लोगों को कम कीमत में ऐसा भोजन मिले, जो स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी हो।
नवंबर में शुरू हो सकती है योजना
श्रम एवं सेवायोजन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अन्नपूर्णा रसोई योजना को नवंबर 2026 के मध्य या त्योहारों के तुरंत बाद शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस योजना का शुभारंभ कर सकते हैं। हालांकि, उद्घाटन की आधिकारिक तारीख पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है।
फिलहाल कैंटीन संचालन के लिए एजेंसियों के चयन और जगहों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अगर योजना तय समय पर शुरू होती है, तो प्रदेश के हजारों जरूरतमंद लोगों को रोजाना सस्ती भोजन सुविधा मिल सकती है।

