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शुक्रवार, नवम्बर 6, 2026
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नौकरी बचाऊं या सेहत?12 घंटे काम के बाद लॉग-आउट करना IT फ्रेशर को पड़ा भारी?

Hyderabad IT News: आईटी सेक्टर में अच्छी नौकरी पाने का सपना लेकर हजारों युवा हर साल कंपनियों में कदम रखते हैं। शुरुआत में बेहतर सैलरी, नए अनुभव और करियर ग्रोथ की उम्मीद होती है। लेकिन कई बार काम का दबाव और ऑफिस की अपेक्षाएं इस सपने को तनाव में बदल देती हैं। ऐसा ही एक मामला हैदराबाद से सामने आया है, जहां एक आईटी फ्रेशर ने 12 घंटे से ज्यादा काम करने के बाद भी लॉग-आउट करने पर अपने सीनियर की नाराजगी का सामना किया। अब इस कर्मचारी को नौकरी जाने का डर सता रहा है।

पांच महीने पहले की थी नौकरी शुरू

रेडिट पर अपनी आपबीती साझा करने वाले इस युवक ने बताया कि उसने करीब पांच महीने पहले एक आईटी कंपनी में फ्रेशर के तौर पर नौकरी जॉइन की थी। हाल ही में उसके प्रोजेक्ट में एक गंभीर तकनीकी समस्या आ गई। इसे ठीक करने के लिए उसने अपना पूरा वीकेंड काम में लगा दिया। इतना ही नहीं, सोमवार को भी उसे देर रात तक काम करना पड़ा।

युवक के मुताबिक, अगले दिन भी उसने सुबह 10 बजे से रात 10:30 बजे तक लगातार काम किया। इस दौरान उसने क्लाइंट की सभी जरूरी मांगें पूरी करने की कोशिश की और इसके बाद सिस्टम से लॉग-आउट कर दिया।

लॉग-आउट करते ही आ गया क्लाइंट का मैसेज

कर्मचारी के मुताबिक, सिस्टम बंद करने के कुछ ही समय बाद क्लाइंट की तरफ से एक छोटी सी समस्या को लेकर मैसेज आया। उस वक्त वह ऑनलाइन उपलब्ध नहीं था। इस बात पर उसके सीनियर ने नाराजगी जताई और सवाल किया कि बिना बताए लॉग-आउट क्यों किया?

गुस्से में जवाब देने के बाद सता रहा नौकरी का डर

युवक ने बताया कि उस समय गुस्से में उसने अपनी बात रख दी, लेकिन बाद में उसे अपने जवाब को लेकर चिंता होने लगी। उसे डर है कि कहीं इस वजह से उसका करियर प्रभावित न हो जाए।

उसके मुताबिक, सीनियर काफी अनुभवी हैं और उन्होंने प्रोजेक्ट से हटाने की धमकी भी दी है। यही वजह है कि अब वह अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर परेशान है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने दी सलाह

रेडिट पर पोस्ट सामने आने के बाद कई यूजर्स ने कर्मचारी का समर्थन किया। कुछ लोगों ने सलाह दी कि ऑफिस में गुस्से में मैसेज भेजने से बचना चाहिए। अपनी बात को हमेशा प्रोफेशनल तरीके से रखना बेहतर होता है।

वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि तय समय से ज्यादा काम लिया जा रहा है तो कर्मचारी को ओवरटाइम भुगतान या अतिरिक्त छुट्टी के बारे में एचआर से बात करनी चाहिए।

इस घटना ने एक बार फिर वर्क-लाइफ बैलेंस और आईटी कंपनियों में काम के दबाव को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल यही है कि क्या बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद में कर्मचारियों के निजी समय और स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना सही है?

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