Dhirendra Shastri Defamation Case: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण पर की गई टिप्पणी को लेकर कानूनी विवाद में घिर गए हैं। उनके बयान के खिलाफ आगरा की सिविल कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत दाखिल की गई है। अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने आरोप लगाया है कि शास्त्री की टिप्पणी से भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों और उनके वंशजों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। अदालत ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख 14 दिसंबर 2026 तय की है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता अजय प्रताप सिंह के मुताबिक, धीरेंद्र शास्त्री ने मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में रामकथा के दौरान भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की शारीरिक मुद्राओं की तुलना की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को ‘टेढ़ा’ बताते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिससे उनके अनुयायियों की भावनाएं आहत हुईं।
अजय प्रताप सिंह ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि वह अपनी ननिहाल की ओर से भगवान श्रीकृष्ण के वंशज हैं। उन्होंने जादौन, जडेजा और भाटी जैसे समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के वंशज आज भी देश में रहते हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस बयान से उनके परिवार और समुदाय की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
आगरा कोर्ट में दाखिल हुई शिकायत
अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने आगरा सिविल कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत दाखिल की। मामले की सुनवाई सिविल जज कंचन कुमार की अदालत में हुई। अदालत ने शिकायत को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए अगली तारीख 14 दिसंबर 2026 निर्धारित की है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल यह आपराधिक मानहानि की शिकायत है। अदालत में शिकायत दाखिल होने या सुनवाई के लिए स्वीकार किए जाने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी को दोषी ठहरा दिया गया है।
अखिलेश यादव और पंकज चौधरी ने भी दी प्रतिक्रिया
इस विवाद पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजकों और प्रायोजकों से विवादित प्रवचनकर्ताओं से दूरी बनाने की अपील की। वहीं, भाजपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए रामचरितमानस की चौपाई का उल्लेख किया और कहा कि जिनका अपना आचरण सवालों के घेरे में हो, उन्हें दूसरों को उपदेश नहीं देना चाहिए।
विवाद के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने जताया खेद
भगवान श्रीकृष्ण पर टिप्पणी को लेकर विरोध बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के बीच कोई भेद करना नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी बातों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।

