UPI MDR Rules: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि नए MDR नियमों का बोझ आम ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा और लोग पहले की तरह बिना अतिरिक्त शुल्क के UPI से भुगतान कर सकेंगे। सरकार के मुताबिक MDR टैक्स या सेस नहीं है, बल्कि पेमेंट सिस्टम से जुड़े पक्षों के बीच शुल्क की व्यवस्था है।
2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर MDR नहीं
नए फ्रेमवर्क के अनुसार 2,000 रुपये तक के P2M UPI लेन-देन पर MDR नहीं लगेगा। 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांजैक्शन 300 रुपये होगी। यह शुल्क ग्राहक से अलग से नहीं लिया जाएगा।
करीब 96% लेन-देन पर असर नहीं
NPCI ने 15 सितंबर को MDR से जुड़ा नया फ्रेमवर्क पेश किया था। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M लेन-देन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि MDR से मिलने वाली राशि केंद्र सरकार के खाते में जमा नहीं होगी, बल्कि पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े बैंकों और सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच शुल्क व्यवस्था का हिस्सा होगी।
विपक्ष के सवालों पर वित्त मंत्री का जवाब
MDR को लेकर विपक्ष की आलोचना पर सीतारमण ने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों के बीच गलतफहमी पैदा की जा रही है। उन्होंने लोगों से किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले तथ्यों की जांच करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि गलत जानकारी के आधार पर बहस करने से आम लोगों में अनावश्यक भ्रम पैदा होता है।
राहुल गांधी के कार्यक्रम पर भी प्रतिक्रिया
वित्त मंत्री ने इंदौर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कार्यक्रम में हुई कथित नकल और मजाक पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी जरूरी है, लेकिन संवैधानिक पद से जुड़े कार्यक्रमों में व्यवहार को लेकर मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

