Entertainment News: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों लगातार चर्चा में है। लंबे इंतजार के बाद यह फिल्म OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी, लेकिन रिलीज के महज दो दिन बाद ही इसे हटा लिया गया। इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक इस फैसले पर बहस तेज हो गई है। कई कलाकारों ने फिल्म के समर्थन में अपनी राय रखी है और इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा मुद्दा बताया है।
गुल पनाग ने साझा किए बचपन के दर्दनाक अनुभव
अभिनेत्री गुल पनाग ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने पंजाब के उग्रवाद वाले दौर को करीब से देखा है। उन्होंने कहा कि उस समय की दर्दनाक घटनाएं आज भी उनकी यादों में हैं। उनके मुताबिक इतिहास के कठिन अध्यायों पर फिल्में बनना और उन पर चर्चा होना जरूरी है।
गुल पनाग ने यह भी कहा कि कोई भी फिल्म इतिहास की किताब नहीं होती, बल्कि एक नजरिया पेश करती है। ऐसे में किसी फिल्म से असहमति हो सकती है, लेकिन उसे बैन करना समाधान नहीं है।
अनुराग कश्यप ने भी जताई नाराजगी
फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने भी फिल्म हटाए जाने का विरोध किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि किसी फिल्म पर जितना प्रतिबंध लगाया जाता है, लोगों की उत्सुकता उतनी ही बढ़ती है। उन्होंने फिल्म देखने की अपील करते हुए सेंसरशिप पर भी सवाल उठाए। हालांकि उनकी पायरेटेड वर्जन देखने वाली टिप्पणी सोशल मीडिया पर अलग बहस का विषय बन गई।
सरकार ने बनाई समीक्षा समिति
फिल्म को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक हाई लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया है। यह समिति फिल्म के कंटेंट की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
क्यों खास है ‘सतलुज’?
बताया जा रहा है कि फिल्म 1990 के दशक में पंजाब में हुई मानवाधिकार से जुड़ी घटनाओं पर आधारित है। पहले इस फिल्म को थिएटर में रिलीज करने की योजना थी, लेकिन सेंसर बोर्ड के साथ लंबे विवाद और कई कट्स की मांग के कारण इसकी रिलीज टलती रही। आखिरकार इसे OTT पर रिलीज किया गया, लेकिन 48 घंटे के भीतर ही प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया।
फिलहाल ‘सतलुज’ को लेकर बहस जारी है। एक तरफ कलाकार इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार इसकी सामग्री की समीक्षा कर रही है। अब सभी की नजर कमेटी की रिपोर्ट और आगे आने वाले फैसले पर टिकी है।

