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गुरूवार, जुलाई 9, 2026
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Jaipur Crime: LDC की नौकरी के लिए रची गई खौफनाक साजिश? जानिए कैसे मिलती है ये सरकारी नौकरी और कितनी होती है सैलरी

Jaipur Crime: राजस्थान की राजधानी जयपुर में सामने आए चर्चित हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है। पुलिस जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक 23 वर्षीय आरुषी शर्मा पर अपनी मां की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे मामले के पीछे सरकारी नौकरी और पारिवारिक संपत्ति हासिल करने की मंशा प्रमुख कारण हो सकती है। हालांकि मामले की जांच जारी है और अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई के बाद ही होगा।

पुलिस जांच में क्या सामने आया?

पुलिस के अनुसार, आरोप है कि हत्या से पहले कई बार वारदात की कोशिश की गई। जांच में सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह भी दावा किया गया है कि पहले आग लगाकर घटना को अंजाम देने की कोशिश हुई, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। इसके बाद कथित तौर पर सड़क हादसे का सहारा लिया गया।

पुलिस का कहना है कि 4 जुलाई को महिला जब अपने बेटे को ट्यूशन छोड़कर लौट रही थीं, तभी तेज रफ्तार वाहन से टक्कर मारकर उनकी हत्या कर दी गई। इस मामले में कई लोगों से पूछताछ की जा रही है।

कौन सी सरकारी नौकरी को लेकर चर्चा?

मामले में जिस सरकारी नौकरी का जिक्र हो रहा है, वह लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) की नौकरी है। आरुषी के पिता जयपुर कोर्ट में LDC पद पर कार्यरत थे। उनके निधन के बाद परिवार को अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) का लाभ मिला और यह नौकरी उनकी पत्नी को दी गई थी।

पुलिस जांच के अनुसार, आरोप है कि आरुषी खुद इस नौकरी को पाना चाहती थी। इसी वजह से जांच में इस एंगल को भी शामिल किया गया है।

LDC की सैलरी कितनी होती है?

राजस्थान की अधीनस्थ अदालतों और हाई कोर्ट में LDC का पद पे मैट्रिक्स लेवल-5 के अंतर्गत आता है।प्रोबेशन के दौरान मानदेय लगभग 13,000 से 20,000 रुपये प्रतिमाह हो सकता है।नियमित नियुक्ति के बाद इन-हैंड सैलरी करीब 33,000 से 40,000 रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकती है।वहीं अनुकंपा नियुक्ति के शुरुआती चरण में मिलने वाला मासिक वेतन लगभग 20,000 से 25,000 रुपये के बीच बताया जाता है।

जांच अभी जारी है

जयपुर का यह मामला लगातार नए खुलासों की वजह से चर्चा में बना हुआ है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आरोपियों से पूछताछ जारी है। फिलहाल यह ध्यान रखना जरूरी है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है। ऐसे मामलों में सभी आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होते हैं।

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