Silver Purity Issue: देश में चांदी की कीमत लगातार बढ़ रही है। निवेशक अब सोने के साथ-साथ चांदी को भी सुरक्षित निवेश के तौर पर देखने लगे हैं। इसी वजह से बाजार में सिल्वर बार, सिक्के, ज्वेलरी और चांदी के बर्तनों की मांग तेजी से बढ़ी है। लेकिन बढ़ती डिमांड के साथ एक नई परेशानी भी सामने आ रही है। बाजार में नकली और कम शुद्धता वाली चांदी तेजी से बिक रही है। इससे ग्राहकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है और चांदी के बाजार की भरोसेमंदी पर भी सवाल उठने लगे हैं। कई लोग बिना जांच के चांदी खरीद रहे हैं और बाद में उन्हें उसकी असली गुणवत्ता का पता चल रहा है।
शुद्धता के मानक पूरे नहीं हो रहे
कीमती धातु कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में बिक रही कई सिल्वर बार और ज्वेलरी तय शुद्धता के मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं। कई मामलों में चांदी में निकेल, लेड और कैडमियम जैसे हानिकारक तत्व भी पाए गए हैं। ये धातुएं स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक मानी जाती हैं। जानकारों के मुताबिक, स्क्रैप सिल्वर से बनी ज्वेलरी और अन्य सामान में इस तरह की मिलावट ज्यादा देखने को मिल रही है। ग्राहक देखने में चमकदार चांदी खरीद लेते हैं, लेकिन उसकी गुणवत्ता कमजोर होती है।
हॉलमार्किंग के बावजूद बनी समस्या
बीआईएस यानी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स ने सितंबर 2025 से चांदी की हॉलमार्किंग जरूरी कर दी है। इसका मकसद ग्राहकों को शुद्ध और प्रमाणित चांदी उपलब्ध कराना है। लेकिन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अभी भी कई ज्वेलर्स इस नियम का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं। इसी वजह से ग्राहकों के लिए असली और नकली चांदी की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे सोने के लिए सख्त नियम लागू हैं, वैसे ही चांदी के कारोबार में भी मजबूत निगरानी जरूरी है।
सेंटर कम होने से बढ़ रही दिक्कत
भारत में हर साल करीब 7 हजार टन चांदी की खपत होती है। इसके बावजूद देश में केवल 286 अस्सेइंग और हॉलमार्किंग सेंटर मौजूद हैं। वहीं सोने की खपत कम होने के बाद भी गोल्ड के लिए 1500 से ज्यादा सेंटर हैं। यही बड़ा अंतर चांदी के बाजार में परेशानी बढ़ा रहा है।
जयपुर, आगरा, राजकोट, कोल्हापुर, सलेम और कटक जैसे शहर चांदी के बड़े कारोबार केंद्र माने जाते हैं। यहां बड़ी मात्रा में चांदी के गहने, पूजा सामग्री और बर्तन बनाए जाते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कई जगह इस्तेमाल होने वाली चांदी की गुणवत्ता संदिग्ध होती है।
सरकार से सख्त नियम की मांग
अब रिफाइनरी कंपनियां सरकार से मांग कर रही हैं कि चांदी रिफाइन करने वाली यूनिट्स के लिए भी लाइसेंसिंग सिस्टम अनिवार्य किया जाए। उनका कहना है कि इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों को शुद्ध चांदी मिल सकेगी।
इस बीच बीएसई और एनएसई भी अपने कमोडिटी प्लेटफॉर्म पर प्रमाणित सिल्वर बार लाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे निवेशकों को भरोसेमंद चांदी खरीदने का सुरक्षित विकल्प मिल सकता है।
ग्राहकों को क्या सावधानी रखनी चाहिए
विशेषज्ञों की सलाह है कि ग्राहक केवल बीआईएस हॉलमार्क वाली चांदी ही खरीदें। खरीदारी से पहले उसकी शुद्धता जरूर जांचें और भरोसेमंद दुकानदार से ही सामान लें। आने वाले समय में अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो नकली चांदी का कारोबार और बढ़ सकता है।

