Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के आगरा में सामने आए चर्चित बाथरूम हत्याकांड का खुलासा करने के बाद डीएसपी अमीषा सुर्खियों में हैं। यह मामला इसलिए भी खास रहा क्योंकि आरोपी पत्नी ने खुद अपने पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी और लंबे समय तक किसी को उस पर शक तक नहीं हुआ। अपनी सूझबूझ और जांच के दम पर एसीपी अमीषा ने इस पेचीदा केस की परतें खोल दीं।
पहली पोस्टिंग में मिला सबसे मुश्किल केस
डीएसपी अमीषा 2022 बैच की अधिकारी हैं और फरवरी 2025 से आगरा में सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के रूप में तैनात हैं। यह उनकी पहली शहरी पोस्टिंग है। इसी दौरान उन्हें ऐसा मामला मिला, जिसमें पति की हत्या कर शव को घर के बाथरूम के नीचे दफना दिया गया था।
शुरुआत में पुलिस के पास कोई मजबूत डिजिटल सबूत नहीं था। न मोबाइल लोकेशन, न कॉल रिकॉर्ड और न ही किसी प्रेम प्रसंग का एंगल। ऐसे में जांच पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और पूछताछ पर टिकी रही।
कैसे खुला बाथरूम हत्याकांड का राज?
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक सुरेंद्र शर्मा अक्सर शराब पीकर पत्नी रूबी शर्मा के साथ मारपीट करता था। इसी दिशा में जांच आगे बढ़ी। लगातार पूछताछ और तथ्यों के मिलान के बाद रूबी शर्मा टूट गई और उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पहले पति को खाने में नींद की गोलियां दीं। फिर उसकी हत्या कर शव को घर के बाथरूम में दफना दिया। अगले दिन मिट्टी डलवाकर ऊपर पक्का फर्श बनवा दिया ताकि किसी को शक न हो।
IPS पिता से मिली प्रेरणा
डीएसपी अमीषा का जन्म लखनऊ में हुआ। उनके पिता विनोद कुमार सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में आईपीएस अधिकारी रहे और डीआईजी जेल के पद से सेवानिवृत्त हुए। दिलचस्प बात यह है कि जिस वर्ष उनके पिता रिटायर हुए, उसी वर्ष अमीषा का चयन डीएसपी के पद पर हुआ।
डीएसपी बनने से पहले अमीषा नायब तहसीलदार भी रह चुकी हैं। उन्होंने प्रशासनिक सेवा से पुलिस सेवा तक का सफर मेहनत और लगन के दम पर तय किया।
मिसाल बनीं डीएसपी अमीषा
आगरा बाथरूम हत्याकांड ने यह साबित किया कि हर मुश्किल केस केवल तकनीक से नहीं, बल्कि धैर्य, बारीकी से जांच और सही दिशा में की गई पूछताछ से भी सुलझाया जा सकता है। पहली बड़ी पोस्टिंग में इस केस का खुलासा कर डीएसपी अमीषा ने अपनी कार्यशैली और जांच क्षमता की मजबूत पहचान बनाई है।

