Uttar Pradesh: आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 41 डॉक्टरों के पंजीयन का मामला एक बार फिर गरमा गया है। मामले में अब एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बोर्ड के प्रशासक मदन गर्ब्याल ने करीब डेढ़ साल पुराने आदेश को रद्द करते हुए रजिस्ट्रार को हुसैनगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
जांच में सामने आए 41 फर्जी पंजीयन
करीब दो साल पहले पांच लोगों के पंजीयन को लेकर फर्जीवाड़े की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग की टीम ने लखनऊ पहुंचकर मामले की जांच की।
जांच में शुरुआती पांच लोगों के अलावा 36 अन्य डॉक्टरों की डिग्रियां भी कथित तौर पर फर्जी पाई गईं। इसके बाद कुल 41 डॉक्टरों के पंजीयन निरस्त कर दिए गए।
कई जिलों में लाइसेंस रद्द, लेकिन नहीं हुई एफआईआर
पंजीयन रद्द होने के बाद सीतापुर, गाजियाबाद, जौनपुर समेत कई जिलों में संबंधित अधिकारियों ने इन डॉक्टरों की डिस्पेंसरी के लाइसेंस भी निरस्त कर दिए थे। हालांकि, आरोपित डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई।
अब नए सिरे से मामले में कार्रवाई शुरू होने के बाद इन सभी मामलों में कानूनी कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।
2024 में हुई थी फर्जी पंजीयन की शिकायत
बोर्ड में फर्जी पंजीयन को लेकर पहली बड़ी शिकायत 16 जुलाई 2024 को केंद्रीय आयुष मंत्रालय से की गई थी। रामपुर के खोड़ गांव निवासी फुरकान ने शिकायत में बोर्ड के रजिस्ट्रार और पांच कर्मचारियों पर फर्जी पंजीयन में शामिल होने का आरोप लगाया था।
इसके बाद अप्रैल 2025 में नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) ने जांच के आधार पर 41 पंजीयन फर्जी होने की पुष्टि करते हुए कार्रवाई की सिफारिश की थी।
अगस्त 2026 में फिर उठा मामला
फर्जी पंजीयन का मामला अगस्त 2026 में एक बार फिर सामने आया। बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष राजेश राय ने मुख्यमंत्री से शिकायत करने के साथ ही बोर्ड के अधिकारों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इस याचिका में फर्जी पंजीयन का मुद्दा भी शामिल था।
20 साल के पंजीयन रिकॉर्ड की भी होगी जांच
बोर्ड के प्रशासक मदन गर्ब्याल ने बताया कि कुछ संदिग्ध पंजीयन की जांच के लिए बोर्ड में टीम बनाई गई है। इसके साथ ही पिछले 20 वर्षों के दौरान हुए पंजीयन की भी जांच कराने की तैयारी है।
उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कैसे होता है आयुर्वेदिक और यूनानी डॉक्टरों का पंजीयन?
भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग अधिनियम-2020 के तहत प्रत्येक राज्य में आयुर्वेदिक और यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड होता है।मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित पाठ्यक्रम पूरा करने वाले स्नातकों को पंजीयन के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद निर्धारित दस्तावेज और शपथ पत्र बोर्ड कार्यालय में जमा किया जाता है।

