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Monday, May 25, 2026
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क्या आपका बच्चा भी कहता है “मुझे स्कूल नहीं जाना”? तो जानिए कैसे प्यार, भरोसे और बातचीत से दूर कर सकते हैं बच्चों का स्कूल जाने का डर

School Anxiety in Children: सुबह का समय हर घर में भागदौड़ से भरा होता है। बच्चों को तैयार करना, टिफिन पैक करना और समय पर स्कूल भेजना किसी चुनौती से कम नहीं होता। लेकिन कई बार इसी बीच बच्चा अचानक रोते हुए कह देता है,“मुझे स्कूल नहीं जाना” या “I Hate School”। अक्सर माता-पिता इसे आलस या बहाना समझ लेते हैं, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। कई बार यह बच्चे के मन में चल रही किसी परेशानी का संकेत भी हो सकता है।

क्यों बढ़ रही है स्कूल एंग्जायटी?

आजकल बच्चों पर पढ़ाई और अच्छे प्रदर्शन का दबाव बहुत बढ़ गया है। कम उम्र में ही होमवर्क, टेस्ट और प्रतियोगिता का बोझ उन्हें मानसिक रूप से थका देता है। जब बच्चा इस दबाव को संभाल नहीं पाता, तो उसके मन में स्कूल के प्रति डर या नफरत पैदा होने लगती है।इसके अलावा, कुछ बच्चों को किसी खास विषय से डर लगता है। जैसे मैथ्स या साइंस में कमजोर होने पर उन्हें क्लास में शर्मिंदगी महसूस हो सकती है। धीरे-धीरे यही डर स्कूल जाने से बचने की वजह बन जाता है।

बुलीइंग भी हो सकती है बड़ी वजह

स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों की पहली सोशल दुनिया भी होती है। अगर किसी बच्चे को दोस्त चिढ़ाते हों, उसका मजाक उड़ाते हों या उसे ग्रुप से अलग रखते हों, तो वह अंदर ही अंदर परेशान रहने लगता है। कई बच्चे खुलकर अपनी बात नहीं बता पाते और सिर्फ इतना कहते हैं कि उन्हें स्कूल पसंद नहीं है।ऐसे में माता-पिता को बच्चे के व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए। अगर बच्चा स्कूल से लौटकर चुप रहने लगे, बार-बार पेट दर्द या सिर दर्द की शिकायत करे या सुबह स्कूल के समय रोने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह किसी तनाव से गुजर रहा है।

स्ट्रिक्ट टीचर्स और बदलता माहौल

हर बच्चा अलग स्वभाव का होता है। कुछ बच्चे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। अगर स्कूल में कोई टीचर बहुत डांटता हो या बच्चे को बार-बार सबके सामने टोकता हो, तो उसका आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। कई बच्चों को स्कूल का सख्त अनुशासन और खेलने-कूदने की कमी भी परेशान करती है।छोटे बच्चों में “सेपरेशन एंग्जायटी” भी आम है। वे घर और माता-पिता से दूर होने पर असुरक्षित महसूस करते हैं। खासकर नए स्कूल या नई क्लास में यह समस्या ज्यादा दिखाई देती है।

माता-पिता क्या करें?

सबसे जरूरी है कि बच्चे की बात को गंभीरता से सुना जाए। उसे डांटने या जबरदस्ती भेजने के बजाय प्यार से समझने की कोशिश करें। बच्चे से अकेले में बात करें और पूछें कि आखिर स्कूल में ऐसा क्या है जो उसे परेशान कर रहा है।अगर मामला पढ़ाई, टीचर या बुलीइंग से जुड़ा हो, तो तुरंत स्कूल और टीचर्स से बात करें। साथ ही घर का माहौल हल्का और सकारात्मक रखें। बच्चे को स्कूल की अच्छी बातें याद दिलाएं, जैसे दोस्त, खेलकूद और नई चीजें सीखना। जब बच्चा महसूस करेगा कि उसके माता-पिता उसकी भावनाओं को समझते हैं, तो उसका डर धीरे-धीरे कम होने लगेगा।

 

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