spot_img
Thursday, May 21, 2026
-विज्ञापन-

More From Author

Political News: बिहार की राजनीति में युग का अंत, 10 बार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब दिल्ली में दिखाएंगे दम

Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में दशकों तक धुरी बने रहे नीतीश कुमार का आज मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य से प्रशासनिक नाता खत्म होने की दिशा में बढ़ गया है। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में जीत और विधान परिषद से इस्तीफे के बाद, आज दिल्ली में उनका शपथ ग्रहण समारोह आयोजित है। यह बदलाव बिहार की सत्ता में एक बड़े शून्य और केंद्र की राजनीति में एक अनुभवी चेहरे के आगमन का संकेत है।

बख्तियारपुर की गलियों से सत्ता के गलियारों तक

नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को पटना के बख्तियारपुर में एक साधारण परिवार में हुआ था।
दवा की पुड़िया से सेवा का भाव: एक आयुर्वेदिक वैद्य के बेटे नीतीश को घर में प्यार से ‘मुन्ना’ कहा जाता था। बचपन में मरीजों के लिए दवा की पुड़ियाँ बनाने वाले मुन्ना ने शायद ही सोचा होगा कि एक दिन वह पूरे बिहार की ‘बीमार’ व्यवस्था का इलाज करेंगे।
छात्र राजनीति की धमक: बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से पढ़ाई के दौरान ही वे छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। उनकी जिद्द और नेतृत्व के आगे तत्कालीन मुख्यमंत्री केदार पांडेय को भी झुकना पड़ा था।

मुख्यमंत्री के रूप में ऐतिहासिक रिकॉर्ड

नीतीश कुमार के नाम बिहार में सबसे ज्यादा 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का अनूठा रिकॉर्ड दर्ज है।
* NDA की बड़ी जीत: 2025 के विधानसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में एनडीए ने प्रचंड बहुमत हासिल किया, जिसने साबित किया कि 75 वर्ष की आयु में भी उनकी लोकप्रियता बरकरार है।
* विकास पुरुष: साइकिल योजना, शराबबंदी और महिला सशक्तिकरण जैसे फैसलों के कारण उन्हें ‘विकास पुरुष’ और ‘सुशासन बाबू’ की उपाधियाँ मिलीं।

दिल्ली में नई भूमिका

नीतीश कुमार के लिए दिल्ली का रास्ता नया नहीं है। वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में प्रभावशाली रेल मंत्री रह चुके हैं।
सक्रिय राजनीति का समापन? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा जाना नीतीश कुमार की सक्रिय राजनीति से सम्मानजनक विदाई की ओर एक कदम हो सकता है।
अनुभव का लाभ: केंद्र की राजनीति में उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव का उपयोग नीति निर्धारण और गठबंधन की मजबूती के लिए किया जा सकता है।

Latest Posts

-विज्ञापन-

Latest Posts