Sesame Seeds: आजकल बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ती उम्र के कारण घुटनों, कमर, गर्दन और कंधों के दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में कई लोग दर्द से राहत पाने के लिए घरेलू और प्राकृतिक उपाय अपनाना पसंद करते हैं। इन्हीं उपायों में तिल का सेवन भी शामिल है, जिसे आयुर्वेद में काफी लाभकारी माना गया है।
तिल में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं?
तिल में कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, आयरन, प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैटी एसिड पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व हड्डियों की मजबूती बनाए रखने, मांसपेशियों के स्वास्थ्य और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को बेहतर रखने में सहायक माने जाते हैं। तिल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में सूजन को कम करने में भी मदद कर सकते हैं।
कैसे करें तिल का सेवन?
विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में तिल को अपनी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। सुबह एक चम्मच भुने हुए तिल गुनगुने पानी के साथ खाए जा सकते हैं। इसके अलावा सलाद, दही, सब्जी या चटनी में मिलाकर भी तिल का सेवन किया जा सकता है। वहीं, तिल के तेल से हल्की मालिश करने से कुछ लोगों को मांसपेशियों और जोड़ों की जकड़न में आराम महसूस हो सकता है।
किन बातों का रखें ध्यान?
हालांकि, केवल तिल खाने से जोड़ों का दर्द पूरी तरह खत्म होने का दावा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। यदि दर्द लगातार बना रहे, सूजन हो, चलने-फिरने में परेशानी हो या गठिया जैसी समस्या हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। किसी भी घरेलू उपाय को इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही, जिन लोगों को तिल से एलर्जी है या कोई गंभीर बीमारी है, उन्हें इसे नियमित रूप से लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

