Russian Oil Tariff: अमेरिका में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की ताकत वाले कानून के बाद भारत पर भी दबाव बढ़ा है। इसी बीच JPMorgan Chase के CEO जेमी डिमोन ने अमेरिकी नीति को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। मुंबई में 21-22 सितंबर को आयोजित JPMorgan India Conference के दौरान डिमोन ने कहा कि रूस पर दबाव बनाने की कोशिश में भारत और वैश्विक तेल बाजार पर अनावश्यक असर नहीं पड़ना चाहिए।
रूसी तेल पर टैरिफ को लेकर क्या बोले डिमोन?
डिमोन ने कहा कि अमेरिका को रूस के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले यह समझना चाहिए कि भारतीय रिफाइनरियां रूसी क्रूड का इस्तेमाल किस तरह करती हैं। उनके मुताबिक, अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है तो उसे अपनी जरूरत पूरी करने के लिए किसी दूसरे स्रोत से क्रूड खरीदना पड़ेगा और वह तेल हर रिफाइनरी के लिए समान रूप से उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह रूसी तेल पर टैरिफ लगाने के विचार के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, डिमोन ने रूस पर दबाव बनाने की जरूरत से इनकार नहीं किया और कहा कि अमेरिका को यूक्रेन की मदद के लिए और कदम उठाने चाहिए।
भारत की रिफाइनरियों का क्या है कनेक्शन?
भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है और रूसी क्रूड उसकी तेल खरीद का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। भारत सरकार ने भी कहा है कि देश की प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा है और वह अलग-अलग स्रोतों से तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
डिमोन के तर्क के मुताबिक, रूसी तेल की खरीद बंद होने पर मांग दूसरे तेल उत्पादक देशों की ओर जा सकती है। इससे वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ने की संभावना का सवाल उठता है।
100% टैरिफ की शक्ति वाला कानून
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हाल ही में पारित रूस प्रतिबंध कानून के तहत रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की शक्ति मिली है। कानून में किसी खास देश का नाम तय नहीं किया गया है, लेकिन भारत और चीन जैसे बड़े रूसी तेल खरीदार इसके संभावित दायरे में हैं।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील भी चर्चा में
रूसी तेल के मुद्दे के साथ भारत-अमेरिका व्यापार संबंध भी अहम बने हुए हैं। डिमोन ने दोनों देशों को व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ाने की सलाह दी। भारत पहले ही कह चुका है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।

